राष्ट्रपति ली ने की कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की अपील, उत्तर कोरिया-अमेरिका वार्ता में मदद की कही बात

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सोल, 18 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने शुक्रवार को एक बार फिर कहा कि वह 1950-53 के कोरियाई युद्ध को रोकने वाले युद्धविराम समझौते की जगह एक स्थायी शांति व्यवस्था बनाना चाहते हैं। यह बात उन्‍होंने नेशनल असेंबली में आयोजित समारोह में कही।

यह समारोह प्योंगयांग संयुक्त घोषणा की याद में आयोजित किया गया था। इस घोषणा पर 19 सितंबर 2018 को तत्कालीन दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने प्योंगयांग में अपनी शिखर बैठक के बाद हस्ताक्षर किए थे। राष्ट्रपति ली का भाषण उनकी ओर से राजनीतिक मामलों के विशेष सलाहकार किम क्यूंग-सू ने पढ़ा।

2018 की इस घोषणा में दोनों कोरियाई देशों ने सीमा पर सैन्य तनाव और दुश्मनी खत्म करने के साथ-साथ आपसी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ली ने कहा कि इस घोषणा के बावजूद उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच बातचीत और सहयोग रुक गया है, जबकि तनाव बढ़ा है। इसी दौरान उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु हथियार क्षमता भी तेजी से बढ़ाई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अब उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दक्षिण कोरिया इस बातचीत को जल्द शुरू कराने में मदद करेगा और कोशिश करेगा कि यह आगे चलकर कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति व्यवस्था बनाने पर बातचीत का रास्ता खोले।

ली का इशारा जाहिर तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर था, जो उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ फिर से कूटनीतिक बातचीत शुरू करने की कई बार कोशिश कर चुके हैं।

राष्ट्रपति ली ने कहा, “हमारी सरकार पूरी कोशिश करेगी कि यह पहल उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने तक पहुंचे और आगे चलकर कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध खत्म करने तथा शांति व्यवस्था स्थापित करने पर बातचीत में बदले।”

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 2018 के समझौते को एक अहम पड़ाव और दिशा दिखाने वाले समझौते के रूप में मानती रहेगी और उसी के मुताबिक अपनी कोशिशें आगे बढ़ाएगी।

इससे एक दिन पहले गुरुवार को दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने कहा था कि अगर उत्तर कोरिया से पहले परमाणु हथियार छोड़ने को कहा जाता है, तो उसके साथ बातचीत दोबारा शुरू करना कभी संभव नहीं हो पाएगा।

उन्होंने यह बात उत्तर कोरिया के साथ शांतिपूर्ण तरीके से साथ रहने के मुद्दे पर मंत्रालय की ओर से आयोजित एक अकादमिक फोरम के उद्घाटन भाषण में कही।

चुंग ने कहा, “हम पुराने तरीके को दोहराकर कोई बातचीत शुरू नहीं कर सकते, जिसमें पहले कार्रवाई करने और बाद में बदले में कुछ देने की बात होती थी और परमाणु निरस्त्रीकरण को पहली शर्त बनाया जाता था।”

उन्होंने कहा कि इस तरह का रवैया अपनाने पर बातचीत कभी शुरू ही नहीं हो पाएगी।

कोरियाई प्रायद्वीप में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए चुंग ने कई मुद्दों पर एक साथ काम करने की बात कही। उन्होंने इसे 'बास्केट अप्रोच' यानी कई जुड़े हुए मुद्दों को एक साथ लेकर आगे बढ़ने का तरीका बताया।

इसमें कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करना, शांतिपूर्ण तरीके से साथ रहने की व्यवस्था को मजबूत बनाना, उत्तर कोरिया और अमेरिका के रिश्तों को सामान्य करना, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और उत्तर-दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग दोबारा शुरू करना शामिल है।

--आईएएनएस

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