नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश अब दुनिया में गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में बैंकों द्वारा दिए गए लगभग एक-तिहाई कर्ज डिफॉल्ट की श्रेणी में आ चुके हैं। दक्षिण एशियाई देशों (सार्क) में भी बांग्लादेश की स्थिति सबसे खराब बताई गई है।
बांग्लादेश के समाचार पत्र द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर ऋण अनुशासन, राजनीतिक प्रभाव में दिए गए कर्ज और ऋण वसूली की कमजोर व्यवस्था के कारण देश का बैंकिंग क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन 37.35 प्रतिशत एनपीएल अनुपात के साथ दुनिया में पहले स्थान पर है, जहां युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके बाद बांग्लादेश 32.26 प्रतिशत एनपीएल अनुपात के साथ दूसरे स्थान पर है। सूची में चाड (31.51 प्रतिशत) और गिनी (31.15 प्रतिशत) क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।
बांग्लादेश बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश में गैर-निष्पादित ऋण बढ़कर 5.89 लाख करोड़ टका हो गए, जो केवल तीन महीनों में 31,000 करोड़ टका की वृद्धि दर्शाते हैं।
देश में कुल बकाया ऋण 18.25 लाख करोड़ टका है। यदि पुनर्गठित ऋण और विशेष निगरानी वाले खातों को भी शामिल किया जाए, तो संकटग्रस्त परिसंपत्तियां बढ़कर 11.2 लाख करोड़ टका यानी बैंकिंग प्रणाली के कुल ऋण का लगभग 61 प्रतिशत हो जाती हैं।
रिपोर्ट में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण कई ऋण ऐसे लोगों को दिए गए, जिनकी भुगतान क्षमता की बजाय उनके राजनीतिक या व्यक्तिगत संबंधों को प्राथमिकता दी गई। इससे बैंकिंग प्रणाली में ऋण स्वीकृति के मानक कमजोर हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग क्षेत्र की पूंजी स्थिति भी तेजी से खराब हुई है। कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो वर्ष 2025 के अंत तक घटकर -2.64 प्रतिशत रह गया, जबकि एक साल पहले यह 3.08 प्रतिशत था। यह नियामकीय न्यूनतम सीमा 12.5 प्रतिशत से काफी नीचे है।
इसके विपरीत, पाकिस्तान का सीआरएआर 20.8 प्रतिशत, श्रीलंका का 19.4 प्रतिशत और भारत का 17.2 प्रतिशत दर्ज किया गया।
एनआरबीसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमडी तौहीदुल आलम खान ने कहा कि क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, पड़ोसी देशों ने सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाकर अपने बैंकिंग क्षेत्र को सुरक्षित रखा, जबकि बांग्लादेश बार-बार कॉरपोरेट और ऋण संबंधी झटकों को झेलता रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डूबे कर्ज बढ़ने से बैंकों को अधिक प्रावधान करना पड़ता है, मुकदमों पर खर्च बढ़ता है, मुनाफा घटता है और उत्पादक क्षेत्रों को नए ऋण देने की उनकी क्षमता भी प्रभावित होती है।
--आईएएनएस
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