Pakistan Transparency Survey : सर्वे डेटा से जनता और सरकारी संस्थानों के बीच भरोसे की गहरी खाई उजागर

पाकिस्तान में सर्वे में सरकारी संस्थानों पर भरोसे की कमी और भ्रष्टाचार की धारणा उजागर हुई।
पाकिस्तान: सर्वे डेटा से जनता और सरकारी संस्थानों के बीच भरोसे की गहरी खाई उजागर

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में जनता और सरकारी संस्थानों के बीच भरोसे की कमी सामने आई है। इप्सोस और फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा जारी एक पारदर्शिता सर्वेक्षण में “धारणा और वास्तविकता के बीच अंतर” को उजागर किया गया है। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

इंडेक्स ऑफ ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी इन पाकिस्तान (आईटैप) को मंगलवार को इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के अनुसार, सर्वे में यह सामने आया कि आम जनता के बीच सरकारी विभागों की छवि आमतौर पर नकारात्मक है, जबकि जिन लोगों ने वास्तव में इन संस्थानों से संपर्क किया है, उनके अनुभव अपेक्षाकृत बेहतर रहे हैं।

ईपीसीसीआई की पहल पर शुरू किए गए आईटैप का उद्देश्य पाकिस्तान में पारदर्शिता और जवाबदेही को मापने के लिए एक स्वदेशी और नियमित बेंचमार्क तैयार करना है। आयोजकों ने बताया कि यह सर्वे दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच फील्डवर्क के आधार पर किया गया, ताकि सरकार और संस्थानों पर जनता के भरोसे का आकलन किया जा सके।

सर्वे के तहत 6,000 से अधिक उत्तरदाताओं (पुरुष और महिलाएं) से साक्षात्कार लिए गए, जो 82 शहरी और ग्रामीण जिलों तथा 195 से अधिक तहसीलों से थे। इसके अलावा, सरकारी संस्थानों के भीतर से 300 लोगों का एक छोटा नमूना भी लिया गया।

सर्वे निष्कर्षों के अनुसार, 68 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि सरकारी संस्थानों में रिश्वतखोरी आम है, जबकि 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से रिश्वत देने के लिए कहा गया था।

इप्सोस पाकिस्तान के मैनेजिंग डायरेक्टर अब्दुल सत्तार बाबर ने डॉन से बातचीत में कहा कि सर्वे से यह स्पष्ट हुआ है कि भ्रष्टाचार को लेकर धारणा वास्तविक अनुभव से कहीं अधिक है।

उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार का स्तर अब भी ऊंचा है, लेकिन इसकी धारणा बेहद मजबूत है और दोनों के बीच का अंतर बहुत बड़ा है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान में सरकारी अस्पतालों की छवि में सुधार हो रहा है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 53 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पिछले 12 महीनों में स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारी अस्पतालों से संपर्क किया था। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों से सरकारी दफ्तरों के प्रति जागरूकता, रिश्वत, भाई-भतीजावाद और अवैध संपत्ति जैसे कुप्रथाओं पर राय, भ्रष्टाचार-रोधी संस्थानों की जानकारी और उठाए गए कदमों से संतुष्टि से जुड़े 36 सवाल पूछे गए।

--आईएएनएस

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...