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ऊर्जा जरूरतों के बजाय वॉरहेड को प्राथमिकता देता है पाकिस्तान में परमाणु कार्यक्रम: रिपोर्ट

ऊर्जा

ब्रसेल्स, 23 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताएं हैं कि संवेदनशील तकनीक जानबूझकर या किसी दुर्घटना के कारण फैल सकती है। गैर-कानूनी परमाणु नेटवर्क के साथ इस्लामाबाद के पुराने संबंधों ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के मामले में उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है, जिसके कारण उसके परमाणु कामकाज की लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच-पड़ताल होती रहती है।

'यूरोपियन टाइम्स' की एक रिपोर्ट में बताया गया है, "पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम शुरू से ही सेना पर केंद्रित रहा है। इसी वजह से परमाणु ईंधन बनाने वाली सुविधाओं और परमाणु नीति से जुड़े हर बड़े फैसले पर सेना का असर दिखता है। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर रहने के कारण पाकिस्तान ने सुरक्षा पर आधारित रवैया अपनाया है, जिसमें परमाणु हथियारों को देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्तर पर दुश्मन को डराने-धमकाने (डिटेरेंस) का मुख्य आधार माना जाता है। इससे दोहरे इस्तेमाल वाली परमाणु सामग्री और तकनीक के प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके लंबे समय के असर को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।"

रिपोर्ट के अनुसार, शुरू से ही पाकिस्तान के नेताओं ने परमाणु क्षमता को अपने बड़े पड़ोसी देश के सामने अस्तित्व बचाने के लिए जरूरी और असमान सुरक्षा माहौल में रणनीतिक संतुलन बनाने वाले साधन के तौर पर देखा है।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया, "परमाणु हथियारों को किसी व्यापक ऊर्जा या औद्योगिक विकास योजना का हिस्सा नहीं बनाया गया, बल्कि बाहरी खतरों और पुरानी शिकायतों के आधार पर बने सुरक्षा के नजरिए से देखा गया। समय के साथ यह सोच ऐसी बन गई है कि मजबूत नागरिक परमाणु क्षेत्र विकसित करने के बजाय परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले सिस्टम (डिलीवरी सिस्टम) को बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। कार्यक्रम का तकनीकी ढांचा तो बढ़ा है, लेकिन ज्यादातर ऐसे तरीकों से जो मुख्य रूप से हथियारों के निर्माण में मदद करते हैं।"

रिपोर्ट में बताया गया है कि परमाणु तकनीक का स्वभाव ही ऐसा है कि उसका दो तरह से इस्तेमाल हो सकता है। जिन प्रक्रियाओं से रिएक्टर का ईंधन बनता है, उन्हीं का इस्तेमाल हथियार बनाने लायक सामग्री तैयार करने में भी किया जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में रिएक्टर के डिजाइन, एनरिचमेंट और परमाणु ईंधन चक्र के प्रबंधन से जुड़े फैसलों पर सेना की जरूरतों का बहुत ज्यादा असर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "जो सुविधाएं सिद्धांत रूप में नागरिक ऊर्जा उत्पादन में मदद कर सकती हैं, उन्हें इस तरह से बनाया और चलाया जाता है कि उनसे हथियार बनाने लायक सामग्री (फिसाइल मटीरियल) ज्यादा से ज्यादा मिल सके, या रणनीतिक जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सैन्य इस्तेमाल के लिए बदला जा सके। भूमिकाओं के इस घालमेल के कारण असल में नागरिक और सैन्य परमाणु क्षेत्रों को अलग-अलग करना मुश्किल हो जाता है।"

पाकिस्तान की कुल ऊर्जा जरूरतों में परमाणु ऊर्जा के सीमित योगदान पर जोर देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कार्यक्रम के गलत दिशा में आगे बढ़ने को दिखाता है।

बिजली की लगातार कमी के बावजूद, पाकिस्तान ग्रिड की स्थिरता और औद्योगिक विकास में अहम योगदान देने वाला बड़ा और एकीकृत नागरिक परमाणु क्षेत्र विकसित करने में नाकाम रहा है। इसके बजाय, निवेश और राजनीतिक ध्यान रक्षा कार्यक्रमों, मिसाइल विकास और परमाणु हथियारों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर ही केंद्रित रहा है।

'यूरोपियन टाइम्स' ने बताया कि नतीजतन, जो परमाणु तकनीक व्यापक राष्ट्रीय विकास में मदद कर सकती थी, वह अब भी मुख्य रूप से दुश्मन को डराने-धमकाने और प्रतिष्ठा के ढांचे में ही उलझी हुई है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी