क्वेटा, 4 सितंबर (आईएएनएस)। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने शुक्रवार को बलूचिस्तान के खुजदार जिले के जेहरी क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के तेज किए गए सैन्य अभियानों की कड़ी निंदा की। आरोप लगाया गया है कि रिहायशी इलाकों में ड्रोन हमले में एक महिला की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए, जबकि 25 नागरिकों को जबरन गायब कर दिया गया।
सूत्रों के हवाले से बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के कथित ड्रोन हमले में पानी लेने गई महिला की मौत हो गई और एक अन्य महिला सहित दो अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। संगठन ने कहा कि मृतक की पहचान और घायलों की मौजूदा स्थिति की पुष्टि करना मुश्किल है।
रिपोर्टों का हवाला देते हुए मानवाधिकार संस्था ने आगे कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर 25 स्थानीय निवासियों को हिरासत में लेकर जबरन गायब कर दिया है। यह घटना जेहरी में लंबे समय से लगे कर्फ्यू के बीच सामने आई है, जो कई महीनों से जारी है।
बीवीजे ने कहा, "कर्फ्यू के कारण जेहरी में मोबाइल फोन सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं, जिससे प्रभावित समुदायों के साथ संचार गंभीर रूप से बाधित हो गया है। इस संचार ब्लैकआउट के कारण जबरन गायब किए गए लोगों के साथ-साथ मारे गए या घायल हुए लोगों के बारे में विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करना विशेष रूप से कठिन हो गया है।"
सैन्य अभियान के दौरान 25 लोगों को जबरन गायब करने और एक महिला की हत्या की आलोचना करते हुए मानवाधिकार संस्था ने कहा, "नागरिकों को निशाना बनाना, लोगों को जबरन गायब करना और सूचना व संचार तक पहुंच को प्रतिबंधित करना गंभीर मानवाधिकार चिंताएं पैदा करता है और तत्काल, स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।"
बीवीजे ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से जेहरी में हो रहे दुर्व्यवहारों की जांच करने, पाकिस्तानी अधिकारियों से सभी लापता लोगों के ठिकाने और सुरक्षा के बारे में जानकारी मांगने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नागरिकों को आगे किसी नुकसान से बचाया जाए।
बलूचिस्तान के तुरबत इलाके में एक और घटना में बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने सड़कों को मनमाने ढंग से बंद करने, जिससे लोगों की आवाजाही रुक गई, और पाकिस्तान फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) द्वारा जनता के खिलाफ की गई हिंसा को बहुत निंदनीय बताया।
अधिकार संस्था ने कहा कि इस्लामाबाद से लाए गए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर को वीआईपी प्रोटोकॉल देने के लिए, तुरबत में लोगों की आवाजाही रोक दी गई और सड़कों को कई घंटों तक बंद रखा गया। इसके नतीजे में, स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, डॉक्टरों, अस्पताल के कर्मचारियों और बिजनेस करने वालों सहित हजारों लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
एक अन्य घटना में बलूचिस्तान के तुरबत क्षेत्र में बीवाईसी ने सड़कों को मनमाने तरीके से बंद किए जाने, नागरिकों की आवाजाही प्रतिबंधित करने और पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) द्वारा आम लोगों के खिलाफ की गई हिंसा को बेहद निंदनीय बताया है।
अधिकार संगठन ने कहा कि इस्लामाबाद से लाए गए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को वीआईपी प्रोटोकॉल देने के लिए तुरबत में लोगों की आवाजाही रोक दी गई और कई घंटों तक सड़कें बंद रखी गईं। इसके चलते स्कूली बच्चों, मरीजों, डॉक्टरों, अस्पताल के कर्मचारियों और कारोबारियों समेत हजारों नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बीवाईसी ने कहा, “जब मरीजों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने सड़कें बंद किए जाने पर सवाल उठाए, तो एफसी ने उनके साथ हिंसा की। एक डॉक्टर पर राइफल तान दी गई और उसे गोली मारने की धमकी दी गई। हिंसा का सामना करने वाले मरीजों में एक गर्भवती महिला भी शामिल थी। इस घटना के विरोध में तुरबत टीचिंग अस्पताल के लोगों, मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों ने अपने काम का बहिष्कार किया और कर्फ्यू जैसी स्थिति खत्म करने तथा नागरिकों के साथ हिंसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।”
संगठन ने कहा, “यह बेहद चिंताजनक है कि बलूचिस्तान में ‘फर्जी नैरेटिव’ तैयार करने के लिए संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इसी उद्देश्य से आम नागरिकों को उनके घरों और इलाकों तक सीमित किया जा रहा है और उनकी आवाजाही की बुनियादी स्वतंत्रता छीनी जा रही है। सुरक्षा के नाम पर बलूचिस्तान में नागरिक जीवन को लगातार प्रतिबंधों और दबाव में रखना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।”
--आईएएनएस
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