पाकिस्तान में नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री बढ़ी: रिपोर्ट

पाकिस्तान में नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री बढ़ी: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 29 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान में हाल के वर्षों में नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री बढ़ी है, क्योंकि डिजिटल लेनदेन की वजह से ड्रग्स तक पहुंचना आसान हो गया है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में युवा न सिर्फ ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं, बल्कि उन्हें बहला-फुसलाकर ड्रग कूरियर भी बनाया जा रहा है।

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द न्यूज इंटरनेशनल' के एक एडिटोरियल में 'वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2026' का हवाला देते हुए बताया गया है कि ड्रग तस्कर नई तरह की ड्रग्स लाने और उन्हें नए बाजारों में तेजी से बेचने के लिए टेक्नोलॉजी और दुनिया भर में फैली अस्थिरता का फायदा उठा रहे हैं।

बाजार में नई तरह की ड्रग्स आई हैं और इनमें से कुछ पहले के मुकाबले ज्यादा असरदार बताई जा रही हैं। पाकिस्तान में भी हाल के सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें ड्रग नेटवर्क इन तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इनमें सबसे अहम मामला ड्रग डीलर अनमोल उर्फ पिंकी का है, जिस पर कराची के कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज, स्कूलों, पार्टियों और पॉश इलाकों में कोकीन बेचने का आरोप है। साथ ही, ड्रग्स ऑनलाइन भी बेची जा रही हैं और ऐसा लगता है कि इनका टारगेट युवा हैं।

'द न्यूज इंटरनेशनल' ने कहा, "हाल के सालों में कई एक्सपर्ट्स और अधिकारियों ने देश के युवाओं और शिक्षण संस्थानों में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल और उनकी उपलब्धता की ओर इशारा किया है। 2024 में एंटी-नारकोटिक्स फोर्स (एएनएफ) ने कथित तौर पर 31 ड्रग तस्करों का पता लगाया और 235 यूनिवर्सिटीज से 140 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए। हाल ही में सिंध के एक सीनियर मंत्री ने कहा कि बच्चों में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल से निपटने के लिए राज्य सरकार स्कूलों में तेजी से और रैंडम ड्रग टेस्टिंग करेगी।"

इसमें आगे कहा गया, "क्या यह महज एक इत्तेफाक है कि सबसे ज्यादा ऑनलाइन रहने वाली पीढ़ी में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल के मामले तब बढ़ रहे हैं, जब ड्रग्स का कारोबार तेजी से ऑनलाइन हो रहा है? ऐसा लगता नहीं है, और यह ट्रेंड सिर्फ पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है। ज्यादा विकसित देशों में भी एक दशक से ज्यादा समय से नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री एक समस्या रही है। हो सकता है कि पाकिस्तान में यह समस्या अब इसलिए बढ़ रही हो, क्योंकि हाल के सालों में ऑनलाइन पहुंच तेजी से बढ़ी है। अगर खतरनाक ड्रग्स मंगाना उतना ही आसान हो जाए, जितना कि खाना ऑर्डर करना, तो देश गंभीर मुसीबत में पड़ जाएगा।"

सिंथेटिक ड्रग्स के इस्तेमाल से खतरा और बढ़ गया है। एएनएफ का कहना है कि ये ज्यादा असरदार होते हैं और इन्हें छिपाना आसान होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल ट्रांजेंक्शन ने ड्रग्स तक पहुंचना आसान बना दिया है। युवा न सिर्फ ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं, बल्कि उन्हें आसान पैसे और शानदार लाइफस्टाइल का लालच देकर ड्रग कूरियर बनने के लिए भी बहकाया जा रहा है।

फरवरी में स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में रिहैबिलिटेशन मामलों की 2025 की एक व्यवस्थित समीक्षा का हवाला दिया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान युवाओं में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल और आत्महत्या की बढ़ती दरों के गंभीर संकट से जूझ रहा है।

अध्ययन में पाया गया कि युवाओं में नशीले पदार्थों के गलत इस्तेमाल के मामलों में हेरोइन की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है, जबकि कैनबिस (गांजा) की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है। इससे देश की युवा आबादी में लत के खतरनाक स्तर और गंभीरता का पता चलता है।

अध्ययन के अनुसार, 35 प्रतिशत लोगों ने किशोरावस्था में ड्रग्स लेना शुरू किया और 46 प्रतिशत लोगों में डिप्रेशन (अवसाद) की समस्या पाई गई।

कराची यूनिवर्सिटी में बताए गए 2024 के एक सर्वे के अनुसार, यूनिवर्सिटी और कॉलेज के 44 प्रतिशत छात्रों ने ड्रग्स के इस्तेमाल की बात मानी, जिनमें 53 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। साथ ही, ऑनलाइन ड्रग्स खरीदने का चलन भी बढ़ रहा है। पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने यह जानकारी दी।

रिपोर्टों से पता चलता है कि 30 साल से कम उम्र के पाकिस्तानियों में आत्महत्या मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। 15 से 18 साल के किशोर विशेष रूप से जोखिम में हैं, जिनमें जहर खाना और फांसी लगाना आत्महत्या के आम तरीके पाए गए हैं। आत्महत्या से जुड़े अपराध और सामाजिक कलंक के कारण इसके विश्वसनीय मासिक आधिकारिक आँकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की एंटी-नारकोटिक्स फोर्स ने चेतावनी दी है कि 18 से 31 साल की उम्र के लाखों लोग संभावित जोखिम का सामना कर रहे हैं, भले ही आंकड़े जुटाने के तरीकों में कुछ कमियां हों।

15 साल तक चले 2025 के एक क्लिनिकल रिव्यू में ड्रग्स के पॉजिटिव पाए जाने की बढ़ती दर का पता चला। टेस्ट किए गए सैंपल में 20 से 30 प्रतिशत से ज्यादा में कैनबिस (गांजा) पाया गया।

पहचाने गए नशे के आदी लोगों में से 70 प्रतिशत से ज्यादा की उम्र 35 साल से ज्यादा थी। आर्थिक तंगी, अफगानिस्तान से आने वाले कैनबिस और हेरोइन की आसानी से उपलब्धता, और बिना इलाज वाली मानसिक बीमारी मिलकर इस संकट को और बढ़ा रहे हैं।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान में अनुमानित 67 से 76 लाख लोग (जो कुल आबादी का लगभग छह प्रतिशत है) ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं, और इनमें से लगभग 40 लाख लोगों को व्यवस्थित इलाज की जरूरत है।

--आईएएनएस

डीकेपी/