इस्लामाबाद, 9 सितंबर (आईएएनएस)। पिछले महीने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित नारोवाल में 100 से 125 साल पुराने मंदिर को तोड़ दिया गया। चौतरफा किरकिरी हुई तो प्रांतीय सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया और इसे प्राकृतिक आपदा की वजह से हुआ हादसा करार दिया। वहीं एक रिपोर्ट दावा करती है कि इस हालिया घटनाक्रम ने पहले से ही हाशिए पर धकेले गए अल्पसंख्यक समुदाय को खौफजदा कर दिया है।
अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह, 'पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी' (पीएमएमपी) के अनुसार पास के मदरसे को ज्यादा जगह मुहैया कराने के मकसद से मंदिर को जान-बूझकर गिराया गया। पाकिस्तान के 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' (ईडीपीबी) (जो बंटवारे के बाद भारत चले गए लोगों की छोड़ी हुई सिख और हिंदू संपत्तियों की देखरेख करता है) ने दावा किया कि जर्जर मंदिर भारी बारिश के कारण गिरा।
'बिटर विंटर' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार ने मंदिर गिरने के बारे में ईटीपीबी के बयान का समर्थन किया है।
पीएमएमपी के चेयरमैन असलम परवेज सहोत्रा ने कहा कि उन्होंने और कई स्थानीय निवासियों ने पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव को लिखित आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने मंदिर गिराने वालों और उस जगह की सुरक्षा न कर पाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि सियालकोट में ईटीपीबी के डिप्टी डायरेक्टर ने जनवरी में एक आदेश जारी किया था, जिसमें मदरसे की लीज रद्द करने, अवैध कब्जेदारों को जगह खाली करने और संपत्ति को सील करने को कहा गया था, लेकिन उस आदेश को कभी लागू नहीं किया गया।
पीएमएमपी ने आरोप लगाया कि मंदिर को एक-एक करके तोड़ा गया और ईंटों व धातु के सामान जैसी चीजें वहां से हटा ली गईं। उन्होंने कहा कि ईटीपीबी और सरकार का यह कहना कि मंदिर गिर गया, इस बात की वजह नहीं बताता कि ये सामान वहां से क्यों गायब हैं। 'बिटर विंटर' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने मंदिर को उसके असली रूप में फिर से बनाने की मांग की और पंजाब सरकार से हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों और ईसाई चर्चों की सुरक्षा करने का आग्रह किया।
'बिटर विंटर' की एक रिपोर्ट कहती है, "अलग-अलग बयानों ने अल्पसंख्यक समुदायों में चिंता फिर से बढ़ा दी है। वे ऐसी पिछली घटनाओं की ओर इशारा करते हैं जिनमें विवादित हालात में ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया गया था। जून में, फारूकबाद में 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब का कुछ हिस्सा मलबे में बदल गया था। आरोप है कि एक स्थानीय व्यापारी ने बिना कानूनी मंजूरी या कोर्ट के आदेश के उसे गिराने का काम किया था।"
इसमें आगे कहा गया, "सिख निवासियों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया, और उसके बाद ही अधिकारियों ने घटना को स्वीकार किया। एक रिपोर्ट में 24 जून की रात का जिक्र करते हुए बताया गया कि उस समय मशीनों ने एक ऐसी इमारत को तोड़ दिया जिसे पीढ़ियों से पवित्र माना जाता था। बाद में अधिकारियों ने माना कि जब तक सिख समुदाय ने आवाज नहीं उठाई, तब तक विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया; साथ ही उन्होंने इमारत के पुनर्निर्माण का वादा भी किया।"
पिछले साल दिसंबर में, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने पाकिस्तान पर जानबूझकर अनदेखी करने, संस्थागत उदासीनता बरतने और दशकों से हिंदू व सिख समुदायों की धार्मिक विरासत को संरक्षित करने से इनकार करने का आरोप लगाया था।
'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) के अनुसार, पाकिस्तान में हिंदू और सिखों के 98 प्रतिशत पूजा स्थल या तो वीरान पड़े हैं, उन पर ताले लगे हैं, उन पर अवैध कब्जा है, या वे खस्ताहाल स्थिति में हैं। मानवाधिकार समूह का कहना है कि यह स्थिति कोई प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि खुद पाकिस्तान के सत्ता ढांचे की विफलता को दर्शाती है।
पाकिस्तान की संसदीय समिति (माइनॉरिटी कॉकस) के सामने पेश की गई एक ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए, अधिकार समूह ने बताया कि कागजों पर दर्ज 1,285 हिंदू पूजा स्थलों और 532 गुरुद्वारों में से केवल 37 ही चालू हालत में हैं।
वीओपीएम ने कहा, "इस अनदेखी को और भी दुखद बनाने वाली बात इसके पीछे का व्यवस्थित भेदभाव है। जहां एक ओर मंदिर ढह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूली पाठ्यक्रम में नफरत फैलाने वाली या भेदभावपूर्ण सामग्री शामिल है। अल्पसंख्यक छात्रों को कम अवसर मिलते हैं और उन्हें मुस्लिम छात्रों की तरह स्कॉलरशिप या कोटा का लाभ नहीं मिलता। सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है, और यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारी भी अक्सर उन बैठकों में शामिल नहीं होते जहां अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर चर्चा होनी होती है। इससे साफ संदेश जाता है कि अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता नहीं दी जाती और उनकी चिंताओं को वैकल्पिक माना जाता है।"
संगठन ने इस दुखद विरोधाभास की ओर भी इशारा किया कि पाकिस्तान दुनिया के सामने करतारपुर जैसी जगहों को गर्व से पेश करता है, जबकि देश भर में सैकड़ों अन्य मंदिर और गुरुद्वारे खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।
--आईएएनएस
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