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पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास और जिहादी इकोसिस्टम का नतीजा है टीटीपी: रिपोर्ट

Pakistan

इस्लामाबाद, 6 सितंबर (आईएएनएस)। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) एक पाकिस्तानी उग्रवादी संगठन है जो पाकिस्तानी इलाके, राजनीतिक इतिहास और उसके अपने जिहादी इकोसिस्टम का नतीजा है। एक रिपोर्ट दावा करती है कि अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पाकिस्तान पिछले पांच साल से टीटीपी के उभार को अफगान समस्या बताता रहा है। वो तालिबान पर टीटीपी लड़ाकों को पनाह देने और उन्हें पाकिस्तान में हमले करने के लिए उकसाने के साथ ही अपने इलाके का इस्तेमाल करने की छूट देने का आरोप लगाता रहा है।

हालांकि पाकिस्तान के आरोप में कुछ सच्चाई है, क्योंकि पाकिस्तानी सैन्य अभियानों के दौरान टीटीपी कमांडर और लड़ाके अफगानिस्तान में घुस गए थे, और तालिबान के सत्ता में लौटने से टीटीपी को फायदा हुआ क्योंकि सैकड़ों कैदियों को रिहा कर दिया गया और अलग-अलग गुट फिर से एक हो गए; यह जानकारी 'स्ट्रिंगर एशिया' की एक रिपोर्ट में दी गई है।

'स्ट्रिंगर एशिया' की रिपोर्ट में विस्तार से बताया, "संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में बार-बार अफगान इलाके में टीटीपी की बड़ी मौजूदगी का जिक्र किया गया है। लेकिन पनाह देना मूल स्थान नहीं है, और मदद करना मालिकाना हक नहीं है। टीटीपी कोई अफगान संगठन नहीं है जो विदेश से पाकिस्तान पर हमला कर रहा हो। यह एक पाकिस्तानी मूवमेंट है, जो पाकिस्तानी इलाके, पाकिस्तानी राजनीतिक इतिहास और पाकिस्तान के अपने जिहादी इकोसिस्टम से जुड़ा है। हो सकता है कि अफगानिस्तान आज टीटीपी को रणनीतिक बढ़त दे रहा हो, ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान ने दो दशकों तक अफगान तालिबान को रणनीतिक बढ़त दी थी, लेकिन यह मुख्य रूप से पाकिस्तानी ही है। यह फर्क मायने रखता है क्योंकि इस्लामाबाद का अफगानिस्तान वाला तर्क असलियत बताने से ज्यादा उसे छिपाता है।"

टीटीपी का उभार न केवल तालिबानी उग्रवादियों को बाहर निकालने की अनिच्छा का नतीजा है, बल्कि यह उस वैचारिक, संस्थागत और राजनीतिक तंत्र से निपटने में पाकिस्तान की विफलता का भी परिणाम है जिसने उन्हें पैदा किया था। इस विफलता का दायरा इतना बड़ा है कि अब इसे छिपाया नहीं जा सकता।

23 अगस्त तक, पाकिस्तान में टीटीपी से जुड़ी कम से कम 128 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 559 लोगों की जान गई है, जिनमें सुरक्षा बलों के 81 जवान भी शामिल हैं। घटनाओं की यह संख्या 2025 की इसी अवधि में बताई गई घटनाओं की संख्या से ज्यादा थी।

टीटीपी ने दावा किया है कि उसने 2025 में 3,573 हमले किए हैं और हज़ारों सुरक्षाकर्मी मारे गए या घायल हुए हैं। टीटीपी मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा में हमले कर रहा है। 2009 से, पाकिस्तान की सेना ने 'राह-ए-रास्त', 'राह-ए-निजात', 'कोह-ए-सुफईद', 'जर्ब-ए-अजब', 'रद्द-उल-फसाद' और 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' जैसे कई ऑपरेशन चलाए हैं।

खबरों के मुताबिक, इनमें हजारों चरमपंथी मारे गए और सैकड़ों ठिकाने नष्ट कर दिए गए। हालांकि, टीटीपी के लड़ाके सीमा पार कर गए, अपने हथियार छिपा दिए और दूसरे गुटों में शामिल हो गए या अधिकारियों का ध्यान कहीं और जाने का इंतजार करने लगे। इस बीच, पाकिस्तान के लोगों को बड़े पैमाने पर विस्थापन, सैन्य प्रतिबंधों, लोगों के जबरन गायब किए जाने, आजीविका छिनने और ऐसी राजनीतिक व्यवस्था का सामना करना पड़ा जिसमें संवैधानिक अधिकारों को अक्सर आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई में बाधा माना जाता था।

'स्ट्रिंगर एशिया' की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, "पाकिस्तान सीमावर्ती जिलों में बमबारी जारी रख सकता है, नए ऑपरेशन की घोषणा कर सकता है और उन दुश्मनों के लिए अरबी नाम गढ़ सकता है जिन्हें उसने कभी खुद ही पाला-पोसा था। वह अपनी लड़ाई अफगानिस्तान तक ले जा सकता है और उससे पैदा हुए क्षेत्रीय संकट को आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई बता सकता है। लेकिन वह जो नहीं कर सकता, वह है पाकिस्तानी विद्रोह को हराना, जबकि वह यह दिखावा करता रहे कि इसकी वजहें पूरी तरह से डूरंड लाइन के दूसरी तरफ़ मौजूद हैं। अफगानिस्तान में पनाह मिलना समस्या का एक हिस्सा है। बाकी समस्या पाकिस्तान की अपनी है।"

2 जुलाई को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मोहमंद जिले में हथियारबंद हमलावरों ने पुलिस गश्ती दल पर हमला किया, जिसमें एक अतिरिक्त स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) समेत दो पुलिसकर्मी मारे गए।

पाकिस्तानी दैनिक 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि यह हमला मचनी इलाके में वारसक लिफ्ट नहर के पास हुआ था, जहां हथियारबंद हमलावरों ने पुलिस की मोबाइल गश्ती टीम पर हमला किया। पुलिस ने कहा कि हमले में एक अतिरिक्त एसएचओ और एलीट फोर्स का कॉन्स्टेबल मारा गया, जबकि गाड़ी का ड्राइवर घायल हो गया था। पुलिस के अनुसार, इस हमले के पीछे 'फितना-अल-खवारिज' आतंकवादी (यह शब्द पाकिस्तान प्रतिबंधित टीटीपी से जुड़े आतंकियों के लिए इस्तेमाल करता है) थे।

--आईएएनएस

केआर/