वियना, 2 जुलाई (आईएएनएस)। 'रंगा सियार,' 'मूर्ख शेर और चालाक खरगोश,' 'प्यासा कौवा' और ऐसी ही भारत की मिट्टी में रची बसी और नेक नियती का पाठ पढ़ाती 'पंचतंत्र की कहानियां' ऑस्ट्रिया के बच्चे पढ़ पाएंगे। इस अभूतपूर्व पहल का अगुवा वियना स्थित भारतीय दूतावास है। भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की सोच वाली इस कोशिश को 'गुरुकुल डिप्लोमेसी' नाम दिया गया है। इसी पहल के तहत ऑस्ट्रिया में भारत के राजदूत शंभू कुमारन ने वियना के एक स्कूल में बच्चों को प्राचीन भारतीय ग्रंथ 'पंचतंत्र' की कहानियां सुनाईं।
ऑस्ट्रिया स्थित भारतीय दूतावास ने इस कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की। दूतावास ने बताया कि हाल ही में ऑस्ट्रियाई स्कूली बच्चों के लिए पंचतंत्र का जर्मन भाषा में अनुवाद प्रकाशित किया गया। इसी पुस्तक के माध्यम से भारतीय राजदूत शंभू कुमारन ने छात्रों को पंचतंत्र की रोचक और प्रेरक कहानियां पढ़कर सुनाईं।
दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा, "गुरुकुल डिप्लोमेसी के तहत भारतीय राजदूत शंभू कुमारन ने वियना में स्कूली बच्चों को पंचतंत्र की कहानियां सुनाईं। भारतीय दूतावास ने हाल ही में ऑस्ट्रियाई छात्रों के लिए पंचतंत्र का जर्मन भाषा संस्करण प्रकाशित किया है।" पोस्ट के साथ कार्यक्रम की झलकियां और छात्रों की प्रतिक्रियाओं का वीडियो भी साझा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कहानियों को उत्साह के साथ सुना और भारतीय लोककथाओं में गहरी रुचि दिखाई। वीडियो में कई छात्र पंचतंत्र की कहानियों से मिली सीख और उनके रोचक पात्रों के बारे में अपने विचार साझा करते नजर आए।
दूतावास ने बताया कि यह पहल वियना शहर (सिटी ऑफ वियना) और स्थानीय स्कूलों में चल रहे 'बाउंस बैक' परियोजना के साथ सफल सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है। 'स्टोरीज फ्रॉम द पंचतंत्र' शीर्षक से शुरू की गई इस वीडियो पॉडकास्ट श्रृंखला में प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई पॉडकास्टर थॉमस ब्रेजिना जर्मन भाषा में पंचतंत्र की कालजयी कहानियों का रोचक अंदाज में वर्णन करेंगे। इसका उद्देश्य ऑस्ट्रियाई बच्चों को भारतीय साहित्य, नैतिक मूल्यों और लोककथाओं से परिचित कराना है।
इस श्रृंखला के शुभारंभ कार्यक्रम में वियना के एक स्कूल के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस अवसर पर ऑस्ट्रिया में भारत के राजदूत शंभू कुमारन ने बच्चों को पंचतंत्र की चुनिंदा कहानियां पढ़कर सुनाईं और उनके साथ संवाद भी किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी पसंदीदा कहानियों और पात्रों के बारे में खुलकर चर्चा की। उन्होंने इन कहानियों से मिली सीख भी साझा की। दूतावास ने कार्यक्रम की झलकियों और विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं का वीडियो भी साझा किया।
भारतीय दूतावास का कहना है कि यह पहल केवल भारतीय साहित्य का परिचय कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कहानी कहने की डिजिटल शैली के माध्यम से दोनों देशों के बच्चों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना और भारतीय मूल्यों को सहज एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत करना भी है।
पंडित विष्णु शर्मा की रचना 'पंचतंत्र की कहानियां', भारतीय साहित्य की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय नीति-कथाओं में से एक मानी जाती है। कहानियां मुख्य रूप से पशु-पक्षियों के पात्रों के माध्यम से नैतिक शिक्षा, बुद्धिमत्ता, नेतृत्व, मित्रता और व्यवहारिक जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। इन कथाओं का दुनिया की अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और इन्हें विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर माना जाता है।