न्यूयॉर्क, 28 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने कहा है कि लंबे समय से चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले ने अमेरिका में उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि भले ही मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं, लेकिन इन आरोपों के कारण अमेरिकी बैंक उनसे सवाल पूछ सकते हैं।
आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पित्रोदा ने सवाल उठाया कि यह मामला लगभग 15 वर्षों से क्यों चल रहा है और अब तक इसका कोई निष्कर्ष क्यों नहीं निकला?
उन्होंने कहा, "यह नेशनल हेराल्ड मामला पिछले 15 साल से चल रहा है। आखिर यह क्या है? आप सत्ता में हैं, सभी पर आरोप लगा देते हैं। यहां तक कि मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप भी लगा देते हैं। आपने कुछ साबित नहीं किया, लेकिन देखिए इससे कितना नुकसान होता है।"
पिछले छह दशक से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे पित्रोदा ने कहा कि इंटरनेट पर उनके नाम को इस मामले से जोड़कर दिखाया जाना भारत की राजनीति से कहीं आगे तक असर डाल सकता है।
उन्होंने कहा, "मेरे जैसे व्यक्ति के लिए, जो अमेरिका में रहता है, अगर कोई इंटरनेट पर देखे और लिखा मिले कि सैम पित्रोदा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल हैं, तो इसका क्या असर होगा?"
उन्होंने कहा, "मेरा बैंक मुझसे पूछ सकता है, 'मिस्टर पित्रोदा, यह क्या मामला है?' लेकिन मैं उन्हें नेशनल हेराल्ड, राजनीतिक पक्षपात और इन सब बातों को कैसे समझाऊं?"
पित्रोदा ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाते समय ज्यादा निष्पक्षता और मर्यादा बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार कीजिए। थोड़ी शालीनता भी होनी चाहिए।
उन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था और अदालतों में लंबित मामलों पर भी चिंता जताई। पित्रोदा का कहना था कि न्याय मिलने में देरी होने से लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता और आरोप सालों तक उनके साथ जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि हम अदालत के मामलों का निपटारा जल्दी क्यों नहीं कर सकते? ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि लोगों को एक साल के भीतर न्याय मिले, 18 या 20 साल बाद नहीं?"
पित्रोदा ने कहा कि भारत को लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए एआई और विकेंद्रीकृत प्रशासन का उपयोग करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिलों को अपने क्षेत्र के मामलों के निपटारे की ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "हमारे यहां पांच करोड़ मामले अदालत में लंबित क्यों हैं? हर जिला यह क्यों नहीं कह सकता कि वह कम से कम अपने लंबित मामलों का निपटारा करेगा?"
जब उनसे पूछा गया कि मामलों का तय समय सीमा में निपटारा करना न्यायपालिका पर छोड़ देना चाहिए या नहीं, तो पित्रोदा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से मामलों में देरी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर न्यायपालिका किसी मामले को सुलझाना भी चाहे, तो भी मुझे लगता है कि उस पर दबाव हो सकता है कि मामले को लंबित ही रहने दिया जाए। पित्रोदा ने न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ता दबाव देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा, "आज के रिकॉर्ड को देखिए। क्या आपको लगता है कि भारत में चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र है? मुझे ऐसा नहीं लगता। मुझे लगता है कि संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ गया है।"
पित्रोदा ने मौजूदा राजनीतिक माहौल की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल से की। उन्होंने कहा कि कम से कम मेरी जानकारी में, मनमोहन सिंह के समय प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से किसी पर दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई थी।
नेशनल हेराल्ड से जुड़ी पूरी कार्रवाई एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के नियंत्रण को यंग इंडियन कंपनी को हस्तांतरित करने के आरोपों पर आधारित है। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशक था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग शिकायत में सैम पित्रोदा, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य लोगों के नाम शामिल किए हैं। हालांकि, आरोपित पक्ष और कांग्रेस पार्टी इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई बताते हैं।
--आईएएनएस
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