उलानबतार, 25 जून (आईएएनएस)। मंगोलिया में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट में हिस्सा ले रही भारतीय सेना की टुकड़ी ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों से जुड़े संयुक्त अभ्यासों में भाग लिया। इन अभ्यासों में गश्त (पेट्रोलिंग), घेराबंदी एवं तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) तथा मानवीय सहायता गतिविधियां शामिल रहीं, जिनसे विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, संचार क्षमता और जटिल परिस्थितियों में समन्वित प्रतिक्रिया देने की क्षमता को और मजबूत किया गया।
भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) ने गुरुवार को कहा कि भारतीय सेना वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए बहुराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने और मिशन के लिए तैयार सैन्य टुकड़ियों के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध है।
एडीजीपीआई ने एक्स पर अभ्यास का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अपने व्यापक अनुभव का लाभ उठाते हुए भारतीय सेना बहुराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने और बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम मिशन-तैयार टुकड़ियों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।”
यह अभ्यास 20 जून से 3 जुलाई तक मंगोलिया की राजधानी उलानबतार में आयोजित किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास में दुनिया भर की सैन्य टुकड़ियां भाग ले रही हैं, जिनका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-7 के तहत शांति समर्थन अभियानों में सहयोग बढ़ाना और आपसी संचालन क्षमता को मजबूत करना है।
भारतीय सेना की 40 सदस्यीय टुकड़ी इस अभ्यास में भाग ले रही है, जिसका प्रतिनिधित्व जाट रेजिमेंट की एक बटालियन के सैनिकों के साथ-साथ सेना की अन्य शाखाओं और सेवाओं के जवान कर रहे हैं।
‘खान क्वेस्ट’ अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2003 में अमेरिका और मंगोलिया की रक्षा सेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के रूप में हुई थी। बाद में इसे बहुपक्षीय शांति स्थापना अभ्यास का स्वरूप दिया गया और इस वर्ष इसका 23वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। भारतीय सैन्य दल की भागीदारी वैश्विक शांति और मंगोलिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, “खान क्वेस्ट अभ्यास का उद्देश्य सहभागी देशों की सैन्य टुकड़ियों को बहुपक्षीय वातावरण में शांति मिशनों के लिए तैयार करना है। अभ्यास के दौरान संयुक्त योजना निर्माण और सामरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें स्थायी और मोबाइल चेक पोस्ट की स्थापना, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान, गश्त, शत्रुतापूर्ण क्षेत्रों से नागरिकों की निकासी, आईईडी रोधी अभ्यास, युद्धक्षेत्र प्राथमिक उपचार और घायलों की निकासी जैसे प्रशिक्षण शामिल हैं।”
मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास सहभागी देशों को संयुक्त अभियानों से जुड़ी रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं के सर्वोत्तम अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, इससे विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच परिचालन तैयारी, आपसी विश्वास और सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा।