वाशिंगटन/बोगोटा, 8 अगस्त (आईएएनएस)। कोलंबिया को उसका नया राष्ट्रपति मिल चुका है। इसके साथ ही अमेरिका और इस दक्षिण अमेरिकी देश के बीच एक नया अध्याय शुरू होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले दक्षिणपंथी नेता अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला के राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद अमेरिकी प्रशासन ने कोलंबिया को करीब 1 अरब डॉलर की सिक्योरिटी एड देने की योजना का ऐलान किया है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि यह सहायता कोलंबिया की नई सरकार के साथ सुरक्षा सहयोग मजबूत करने और साझा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दी जाएगी। यह घोषणा डे ला एस्प्रिएला के शपथ ग्रहण के कुछ ही समय बाद हुई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नए राष्ट्रपति ने तस्वीरों के साथ अपनी आगामी नीतियों को लेकर कुछ बातें रखीं। उन्होंने दावा किया कि "आज कोलंबिया एक नया अध्याय लिख रहा है। टाइगर आ गया है।'
मीडिया आउटलेट कोलंबिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 48 वर्षीय डे ला एस्प्रिएला ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को कैली स्थित पिचिंचा बटालियन सैन्य अड्डे पर राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उन्होंने अपने पहले ही भाषण में देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने, मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और सशस्त्र आपराधिक समूहों के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाने का वादा किया।
उन्होंने कहा कि आपराधिक गिरोहों और नार्को-टेररिस्ट समूहों के सामने अब दो ही विकल्प हैं कानून के सामने आत्मसमर्पण करना या फिर राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी कार्रवाई का सामना करना। डे ला एस्प्रिएला ने यह भी कहा कि सशस्त्र समूहों के साथ शांति वार्ता का विकल्प अब खत्म हो चुका है।
नई सरकार का सबसे बड़ा फोकस कोकीन के उत्पादन पर लगाम लगाने पर है। डे ला एस्प्रिएला ने कहा कि वह कोका की अवैध खेती को खत्म करने के लिए हवाई छिड़काव का इस्तेमाल फिर शुरू करेंगे। कोका वही पौधा है जिसका इस्तेमाल कोकीन बनाने में किया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि ऐसे हर्बीसाइड का इस्तेमाल किया जाएगा जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। साथ ही उन्होंने सशस्त्र समूहों और ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने का संकेत दिया है।
डे ला एस्प्रिएला ने अर्थव्यवस्था को लेकर भी बड़े बदलावों का वादा किया है। उनका लक्ष्य सरकार के आकार को करीब 40 फीसदी तक कम करना और तेल तथा गैस क्षेत्र को फिर से बढ़ावा देना है। हालांकि, उनके कई बड़े चुनावी वादों को लागू करने के लिए उन्हें कांग्रेस में समर्थन हासिल करना होगा, जहां राजनीतिक विभाजन मौजूद है।
एस्प्रिएला को चुनाव के दौरान ट्रंप का समर्थन मिला था। उनका सत्ता में आना ऐसे समय हुआ है जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में राजनीति का झुकाव दक्षिणपंथ की ओर बढ़ रहा है। पेरू, अर्जेंटीना, चिली, इक्वाडोर, बोलीविया और पनामा में भी अपराध, कमजोर अर्थव्यवस्था और सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति के केंद्र में रहे हैं।
नई सरकार ने यह भी घोषणा की है कि कोलंबिया ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ‘शील्ड ऑफ द अमेरिकाज’ सुरक्षा कार्यक्रम में शामिल होगा। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा गया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग का संकेत माना जा रहा है।
डे ला एस्प्रिएला की नीतियां पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो की सरकार से काफी अलग हैं। पेट्रो ने सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत और ‘टोटल पीस’ नीति के जरिए हिंसा कम करने की कोशिश की थी। इसके विपरीत नए राष्ट्रपति ने बातचीत के रास्ते को लगभग पूरी तरह खारिज करते हुए सुरक्षा बलों के जरिए निर्णायक कार्रवाई का संकेत दिया है।
राष्ट्रपति ने पेट्रो पर सशस्त्र समूहों को बढ़ावा देने का जिम्मेदार बताया है। दूसरी ओर, पेट्रो ने नए राष्ट्रपति की जीत को मान्यता नहीं दी है। विपक्षी नेता इवान सेपेडा ने शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा का रास्ता अपनाएगा।
--आईएएनएस
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