नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में भारत-ईयू व्यापार समझौते को गेम-चेंजिंग करार दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच के कनेक्शन को भी मजबूत करेगा।
राजदूत डायना मिकेविचिएने ने कहा कि भारत और बाल्टिक देशों के बीच 100 साल पुराना बौद्धिक नाता रहा है, और शांतिपूर्ण प्रदर्शन यही साबित करते हैं कि सच सबसे ताकतवर हथियार है और अंत में जीत उसी की होती है।
भारत में लिथुआनिया की राजदू डायना मिकेविचिएने ने आईएएनएस से कहा, "लिथुआनिया का मानना है कि यह एक गेम-चेंजिंग एग्रीमेंट है। यह न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि तकनीक, सुरक्षा और कई दूसरे क्षेत्र में लेन-देन को भी मजबूत करेगा, जिसमें लोगों के बीच कनेक्शन भी शामिल हैं। इसलिए, यह न सिर्फ द्विपक्षीय संबंध के लिए बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम के लिए भी एक गेम-चेंजर है।"
उन्होंने कहा कि ये बातचीत और शांतिपूर्ण प्रदर्शन सिर्फ एक बात साबित करते हैं कि सच सबसे ताकतवर हथियार है और आखिर में सच की ही जीत होगी।
भारत में लिथुआनिया के राजदूत ने कहा, "हम बहुत खुश हैं कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों की नींव मजबूत है और यह ऐतिहासिक कनेक्शन इसका एक जरूरी हिस्सा है। हमें एहसास हुआ कि हम पहले के समय में भी कितने करीब से जुड़े हुए थे, जब इंटरनेट या एविएशन नहीं था। फिर भी, आइडिया फैले और लोगों ने सफर किया, जिससे हमारे संबंधों की नींव मजबूत हुई।"
उन्होंने कहा कि आज बेशक, हम मजबूत व्यापार और आर्थिक सहयोग बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। मुझे यह कहते हुए भी बहुत खुशी हो रही है कि तकनीकी लेन-देन और तकनीकी साझेदारी का विकास हमारे संबंधों के इस नए चरण का एक जरूरी हिस्सा है।
भारत में लिथुआनिया की राजदूत ने कहा, "लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देशों और भारत के लोगों के बीच लगभग 100 वर्षों के बौद्धिक आदान-प्रदान का हमारा एक दर्ज इतिहास है। ये आदान-प्रदान उस समय से है जब भारतीय नेता अभी भी उभरते राष्ट्र को स्वतंत्रता की ओर ले जाने के सर्वोत्तम तरीकों की तलाश कर रहे थे।"
उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि हमारे नेताओं ने भारतीय विचारकों और नेताओं के साथ बातचीत की, और मुझे यकीन है कि प्रेरणा इन गहन बौद्धिक आदान-प्रदान से ही आई।
डायना मिकेविचिएने ने कहा, "बेशक, हम संघर्षों और आक्रामक युद्धों से भरी दुनिया में रह रहे हैं। 37 साल पहले हमने जो किया, उसका महत्व यह है कि इसने दिखाया कि कैसे इंसान एकजुट होकर शांति का संदेश दे सकते हैं। हालांकि, यह केवल बुराई का विरोध करने से इनकार करने का एक निष्क्रिय संदेश नहीं है, बल्कि यह सक्रिय रूप से समस्याओं को हल करने, आक्रामकता का विरोध करने और मानवीय बंधन को इस तरह से मजबूत करने के बारे में है कि आक्रमणकारी के पास कोई तर्क ही न बचे।"
इसके अलावा, एक कार्यक्रम के संबोधन के दौरान भारत में लिथुआनिया की राजदूत ने कहा, "यहां आने और हमारे साथ रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। हम सभी के लिए इसका बहुत महत्व है। आपकी उपस्थिति और आशीर्वाद के बिना, यह अवसर बिल्कुल वैसा नहीं होता। डॉ. अन्नामलाई, जिन्होंने मुझे हमारी संबंधित यात्राओं और शोध में समान सूत्र खोजने और जो कुछ हम साझा करते हैं और जो हममें समान है, उसका जश्न मनाने के लिए प्रेरित किया।"
उन्होंने कहा कि इस अद्भुत संग्रहालय के बोर्ड के प्रिय सदस्यों, दिल्ली सरकार के महासचिव डॉ. महेश, और हर कोई जिसे मैं व्यक्तिगत रूप से संबोधित करने से चूक गई होऊंगी, प्रिय मित्रों और सहयोगियों, आज इस बहुत ही विशेष दिन पर आप हमारे साथ हैं, यह वास्तव में हमारे लिए बहुत मायने रखता है। आज, वास्तव में, 23 अगस्त बाल्टिक देशों, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के लोगों के लिए महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि गांधी का अहिंसक दृष्टिकोण इस आंदोलन के लिए प्रेरणा के स्रोतों में से एक था। जैसा कि प्रोफेसर अन्नामलाई ने सही ढंग से बताया है, यह एक मान्यता प्राप्त तथ्य है कि बाल्टिक वे, और अधिक व्यापक रूप से, बाल्टिक राज्यों का स्वतंत्रता संग्राम, सुदूर उत्तर में गांधीवादी सिद्धांतों का एक अविश्वसनीय और उल्लेखनीय प्रतिबिंब था।
--आईएएनएस
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