ढाका, 21 अगस्त (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बांग्लादेश को मिलने वाला कर्ज फिलहाल अटक गया है। विभिन्न कारण गिनाते हुए आईएमएफ ने ये फैसला लिया है। मुख्य तौर पर वित्तीय क्षेत्र में लंबित सुधार, सब्सिडी कम करने की शर्तों और जलवायु जोखिमों से निपटने की क्षमता को लेकर प्रगति न होने के कारण अगली किस्तों को रोक दिया गया है।
युनाइटेड न्यूज बांग्लादेश (यूएनबी न्यूज एजेंसी) ने बताया, बांग्लादेश सरकार आईएमएफ के मौजूदा 4.7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम को फिर सक्रिय कराने के साथ-साथ बजट समर्थन के लिए 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त कर्ज चाहती है। लेकिन आईएमएफ ने नए वित्तपोषण के लिए व्यापक आर्थिक सुधारों और जलवायु जोखिम प्रबंधन की क्षमता को प्रमुख शर्त बनाया है।
आईएमएफ की प्रमुख शर्तों में बैंकिंग क्षेत्र और बैंकिंग कानूनों में सुधार, राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (एनबीआर) की क्षमता बढ़ाना, करदाताओं की जानकारी तक सिंगल-क्लिक पहुंच, ईंधन और बिजली पर सब्सिडी हटाना तथा बाजार आधारित विदेशी मुद्रा विनिमय दर लागू करना शामिल हैं।
इसके अलावा जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों के आकलन और उनसे निपटने के लिए संस्थागत क्षमता विकसित करना भी अहम मुद्दा है। आईएमएफ की हालिया तकनीकी सहायता टीम ने 19 से 30 जुलाई तक ढाका में रहकर बांग्लादेश की जलवायु नीतियों, वित्तीय ढांचे और जोखिम प्रबंधन क्षमता की समीक्षा की।
बांग्लादेश को आईएमएफ की रिजिलियंस एंड सस्टेनिब्लिटी फैसिलिटी (आरएसएफ) के तहत करीब 1 अरब एसडीआर यानी लगभग 1.4 अरब डॉलर की सुविधा मिली थी। इसकी करीब दो-तिहाई राशि जारी हो चुकी है, जबकि बाकी राशि लंबित है। बांग्लादेश एशिया का पहला देश था जिसे इस सुविधा के तहत आईएमएफ से वित्तपोषण मिला था।
आईएमएफ के अनुसार, आरएसएफ का उद्देश्य जलवायु जोखिमों के खिलाफ बांग्लादेश की आर्थिक मजबूती बढ़ाने के लिए वित्तीय गुंजाइश तैयार करना है। आईएमएफ ने वित्तीय क्षेत्र और जलवायु लचीलेपन से जुड़े सुधारों को देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
बांग्लादेश के लिए चुनौती यह है कि आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए उसे एक साथ बैंकिंग सुधार, राजस्व संग्रह बढ़ाने, सब्सिडी में कटौती, विनिमय दर सुधार और जलवायु नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कदम उठाने होंगे। इन सुधारों में देरी से न केवल मौजूदा ऋण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है, बल्कि प्रस्तावित नए वित्तपोषण पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
--आईएएनएस
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