वाशिंगटन: एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में आर्थिक झटका लगा है। ईरान और अमेरिका संघर्ष की वजह से होर्मुज के रास्ते से एनर्जी मार्केट सप्लाई में रुकावट आ गई है।
द वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध का ग्लोबल एनर्जी फ्लो पर असर बढ़ रहा है, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कॉन्टिनेंट्स में तेल, गैस और ज़रूरी सप्लाई चेन में रुकावट आ रही है।
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अब यह संकट का केंद्र बन गया है। ईरान ने अमेरिका-इजरायली हमलों के जवाब में समुद्री ट्रैफिक पर रोक लगा दी है। इस रुकावट का असर पहले से ही ग्लोबल मार्केट में दिख रहा है।
द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एनर्जी की कीमतें बढ़ रही हैं, सप्लाई चेन टाइट हो रही हैं और सरकारें लंबे समय तक कमी के लिए तैयारी कर रही हैं। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर लड़ाई जारी रही तो इसका अर्थव्यवस्था पर लंबा असर हो सकता है।
ऊर्जा निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर भारत ने सप्लाई पक्की करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं।
अमेरिकी मीडिया सीएएन के मुताबिक, भारत ने सालों में पहली बार ईरान से तेल खरीदा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते लंबे समय तक ईरानी कच्चे तेल से दूरी बनाए रखने के बाद भारत ने अब फिर से ईरान से तेल आयात शुरू किया है, जिसे एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने ईरान से 44,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भी इंपोर्ट की है, जिसकी शिपमेंट मैंगलोर पोर्ट पर पहुंच गई है।
द वाशिंगटन पोस्ट के आकलन के मुताबिक, अगर यह रुकावट तीन महीने तक रहती है, तो तेल की कीमतें 170 प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं, जबकि छह महीने तक चलने वाला लंबा टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेल सकता है।
सप्लाई में रुकावट सिर्फ एनर्जी तक ही सीमित नहीं हैं। इस रुकावट का असर फर्टिलाइजर शिपमेंट, पेट्रोकेमिकल्स और इंडस्ट्रियल इनपुट पर भी पड़ रहा है, जिसकी कमी पहले ही एशिया में दिख रही है और आने वाले हफ्तों में इसके यूरोप और अमेरिका तक फैलने की उम्मीद है।
द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन जैसे देशों में पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को प्लास्टिक, टेक्सटाइल और कंज्यूमर गुड्स जैसे कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के इस संघर्ष की वजह से खेती भी खतरे में है।
इस वजह से, कई देशों ने फ्यूल की राशनिंग और बचाने के तरीके शुरू किए हैं, जबकि दूसरे देश असर को कम करने के लिए दूसरे सप्लाई के रास्ते और इमरजेंसी रिजर्व ढूंढ रहे हैं।
--आईएएनएस
