काहिरा, 23 अगस्त (आईएएनएस)। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों और तनाव कम करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों पर चर्चा की।
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में बताया कि दोनों मंत्रियों ने ऐसे माहौल बनाने के प्रयासों पर बात की, जिससे कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू हो सके। इसमें 18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने का मुद्दा भी शामिल था।
अब्देलत्ती ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा तनाव को कम करने और शांतिपूर्ण समझौतों तक पहुंचने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को और तेज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि खाड़ी देशों की सुरक्षा और स्थिरता का सम्मान किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के सभी लोगों के हितों की रक्षा हो सके।
बयान के अनुसार, अराघची ने मिस्र के विदेश मंत्री को हाल की घटनाओं, चल रही वार्ताओं और उनके सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में ईरान का दृष्टिकोण बताया।
अमेरिका-ईरान एमओयू के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत कर अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह अवधि सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर फिर से बढ़े तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य अभी भी स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ 'अब तक का सबसे कड़ा आर्थिक अभियान' शुरू करेगा।
इस बीच, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा है कि ईरान को पड़ोसी देशों से क्षेत्र में 'नई सुरक्षा व्यवस्था और आर्थिक सहयोग' को लेकर कई संदेश मिले हैं।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट में कालीबाफ ने कहा कि अमेरिका ने 'इजरायल के हितों के लिए दबाव की राजनीति और सहयोगियों के हितों की अनदेखी करके अपने हर सहयोगी की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।"
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर विकसित और स्वतंत्र क्षेत्रीय व्यवस्था ही वास्तव में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और क्षेत्र के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें और ड्रोन भेजे थे।
मीडिया रिपोर्टों में क्षेत्रीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि खाड़ी अरब देश वॉशिंगटन से नाराज हैं। उनका मानना है कि अमेरिका ने युद्ध शुरू तो किया, लेकिन उनसे जुड़े सुरक्षा जोखिमों से उनकी पर्याप्त रक्षा नहीं की।
--आईएएनएस
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