बीजिंग, 13 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में, कुछ पश्चिमी मीडिया और थिंक टैंक ने तथाकथित 'चाइना स्क्वीज सिद्धांत' को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, उनका दावा है कि चीन का औद्योगिक निर्यात वैश्विक बाजार में जगह कम कर रहा है और विकासशील देशों की औद्योगीकरण प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है।
इस कथन के जवाब में, अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के इतिहासकार एडम टूज ने एक लेख लिखा, जिसमें बताया गया कि 'चाइना स्क्वीज सिद्धांत' आर्थिक डेटा विश्लेषण पर आधारित नहीं है, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक विचारों से प्रेरित है और एक 'पूरी तरह से धोखा' है।
प्रोफेसर एडम टूज के विश्लेषण के अनुसार, पिछले एक दशक से तथाकथित 'चीन संकट' को लेकर पश्चिम का प्रचार मूल रूप से हर चीज के लिए चीन को दोषी ठहराने का एक प्रयास है: अमेरिका के औद्योगीकरण में गिरावट के लिए चीन को दोषी ठहराया जाता है। यूरोप की औद्योगिक रुकावट के लिए चीन को दोषी ठहराया जाता है; और विकासशील देशों के विकास में आने वाली बाधाओं के लिए चीन को दोषी ठहराया जाता है। और बदनामी फैलाने वाले अभियानों की रणनीति अपरिवर्तित रहती है: पहले, थिंक टैंक अवधारणाएं गढ़ते हैं और रिपोर्ट जारी करते हैं, फिर मीडिया रिपोर्टों के साथ उनका अनुसरण करता है और प्रसार के दायरे को बढ़ाता है, इसके बाद राजनेता इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का अवसर लेते हैं।
प्रोफेसर टूज के अनुसार, यह दावा कि 'चीन अन्य देशों को औद्योगीकरण के अवसर से वंचित करता है' एक दुष्प्रचार वाला अभियान है, जिसका उद्देश्य 'दुनिया को सामान्य बनाना' नहीं है, बल्कि 'चीन को रोगग्रस्त' ठहराना है, जो कि एक 'तथ्य विपरीत विश्व दृष्टि' है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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