नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। श्रीलंका की भारत में उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन ने भारत और श्रीलंका के बीच फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग, निवेश, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाओं पर जोर दिया है। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से श्रीलंका में निवेश और साझेदारी का आह्वान भी किया।
नई दिल्ली में आयोजित फार्मा मैकटेक एक्सपो एवं लैबनेक्स्ट एक्सपो 2026 के तहत 8 सितंबर को हुए एम्बेसडर्स कॉन्फ्रेंस ऑन हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज एंड फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग को संबोधित करते हुए उच्चायुक्त ने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत दवा व्यापार संबंध मौजूद हैं, जिन्हें अब विनिर्माण, निवेश और तकनीकी सहयोग के जरिए और व्यापक बनाया जा सकता है।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (ईईपीसी इंडिया) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 15 देशों के राजनयिकों, भारत सरकार के वरिष्ठ नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
महिशिनी कोलोन ने बताया कि श्रीलंका अपनी अधिकांश दवा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जबकि घरेलू निर्माता कुल मांग का केवल सीमित हिस्सा ही पूरा करते हैं। ऐसे में सक्रिय औषधि अवयव (एपीआई), मेडिकल डिवाइस, लैब और डायग्नोस्टिक तकनीक तथा क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए निवेश और उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीलंका सरकार ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र को प्राथमिकता वाले निवेश क्षेत्रों में शामिल किया है। पात्र विनिर्माण परियोजनाओं को लंबी अवधि की कर रियायतें और नेशनल मेडिसिन्स रेगुलेटरी अथॉरिटी के माध्यम से त्वरित नियामकीय मंजूरी की सुविधा दी जा रही है।
उच्चायुक्त ने हम्बनटोटा में स्थापित विशेष फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग जोन का भी उल्लेख किया, जहां कंपनियां उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं का विकास कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत 50 से अधिक श्रेणियों के फार्मास्युटिकल उत्पादों और मेडिकल डिवाइस को भारतीय बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच का लाभ मिलता है, जो दोनों देशों के उद्योगों के लिए अतिरिक्त अवसर प्रदान करता है।
महिशिनी कोलोन ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के लिए बाजारों के निकट विनिर्माण क्षमता विकसित करना समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने तकनीक हस्तांतरण, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और नियामकीय समन्वय जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को श्रीलंका एक्सपो 2027 में भाग लेने का निमंत्रण दिया। यह श्रीलंका का प्रमुख व्यापार एवं निवेश प्रदर्शनी आयोजन है, जो 14 से 17 जनवरी 2027 तक कोलंबो में आयोजित होगा। इसमें भारतीय कंपनियां व्यापार, निवेश और साझेदारी के नए अवसर तलाश सकेंगी।
--आईएएनएस
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