बांग्लादेश: अवामी लीग कार्यकर्ता के भाई पर हमला, पार्टी बोली- 'देश में डर का माहौल'

बांग्लादेश: अवामी लीग कार्यकर्ता के भाई पर हमला, पार्टी बोली- 'देश में डर का माहौल'

ढाका, 18 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हालिया मामला अवामी लीग से जुड़े कार्यकर्ता के भाई पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ा है। गुरुवार को अवामी लीग ने कुश्तिया जिले के कुमरखाली उपजिला में पार्टी के एक कार्यकर्ता के परिवार के सदस्य पर कथित रूप से हुए गंभीर हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की।

अवामी लीग के अनुसार, कुमरखाली उपजिला में पार्टी की युवा इकाई जूबो लीग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.एम. रफीक के छोटे भाई को उस समय हमला किया गया जब वह नगरपालिका कार्यालय में नागरिक प्रमाणपत्र (सिविक सर्टिफिकेट) लेने गया था। बाद में उसे इलाज के लिए कुश्तिया जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पार्टी ने कहा, “यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। 1 मई 2025 को एस.एम. रफीक खुद एक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित घटना का केंद्र बने थे, जब उन्हें शहीद गोलम किबरिया पुल क्षेत्र से ले जाया गया था। उस घटना पर देशभर में व्यापक मीडिया कवरेज और सार्वजनिक बहस हुई थी। लेकिन आज, एक साल से अधिक समय बाद, उनके ही परिवार का एक और सदस्य हिंसा का शिकार हुआ है।”

अवामी लीग ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं बांग्लादेश में “राजनीतिक धमकी, भीड़ हिंसा और डर के माहौल” के बढ़ते चलन को दर्शाती हैं।

आलोचकों का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि ये हमले कथित रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार के तहत और अधिक सामान्य हो गए हैं, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल उठते हैं।

पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर एक परिवार को कितनी बार इस तरह की हिंसा झेलनी पड़ेगी।

अवामी लीग पर लगातार कार्रवाई को लेकर चिंता जताते हुए, पार्टी नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अली अराफात ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों से पार्टी के 100 से अधिक पूर्व सांसद, मंत्री और केंद्रीय नेता बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि उन पर आरोप सही हैं, तो फिर उन्हें बिना मुकदमे के क्यों रखा जा रहा है और फर्जी मामलों की जरूरत क्यों पड़ रही है।

अराफात ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अवामी लीग नेताओं पर लगे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और क्या उन्हें बदनाम करने के लिए झूठे मामले बनाए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/