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अमेरिकी स्कॉलर ने आरएसएस को अलग-थलग करने के खिलाफ चेतावनी दी

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वॉशिंगटन, 8 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में राजनीतिक नेताओं और एडवोकेसी ग्रुप्स द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को अलग-थलग करने का अभियान अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा सकता है और अमेरिका-भारत संबंधों को मजबूत करने की कोशिश को कमजोर कर सकता है। यह बात अमेरिकी विदेश नीति के एक स्कॉलर ने कही है।

हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो बिल ड्रेक्सेल ने 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' के एक ओपिनियन आर्टिकल में यह तर्क दिया। यह आर्टिकल 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के लगभग 5,000 लोगों को संबोधित करने के बाद प्रकाशित हुआ था।

इस कार्यक्रम को 'सार्वभौमिक एकता' के उत्सव के रूप में पेश किया गया था।

बुकिंग रद्द करने की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने आरएसएस की हिंदू राष्ट्रवादी सोच को 'अलग करने वाली' और इसके उभार को 'बेहद चिंताजनक' बताया। उन्होंने यह भी माना कि शहर का इस निजी कार्यक्रम पर कोई अधिकार नहीं था।

आर्टिकल के अनुसार, यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने भागवत का वीजा रद्द करने की मांग की। टोरंटो में उनके अगले कार्यक्रम से पहले, लगभग 270 संगठनों ने कनाडाई सरकार से उन्हें रोकने और आरएसएस को आतंकवादी संगठन घोषित करने पर विचार करने का आग्रह किया।

लंदन में भी समूहों ने मेयर सादिक खान से कहा कि वे अपनी यात्रा के दौरान भागवत को शहर के नियंत्रण वाले किसी भी स्थान पर कार्यक्रम करने की अनुमति न दें।

ड्रेक्सेल ने तर्क दिया कि भारत में आरएसएस के आकार, पहुंच और प्रभाव के कारण ऐसी कोशिशों से उसके कमजोर होने की संभावना कम है। इजरायल के खिलाफ अभियान की तरह ही आरएसएस को अलग-थलग करने की कोशिश उस संगठन की तुलना में अमेरिकी हितों को अधिक नुकसान पहुंचाती है, जिसे निशाना बनाया जा रहा है।

आर्टिकल के अनुसार, आरएसएस पूरे भारत में लगभग 83,000 नियमित स्थानीय बैठकें आयोजित करता है। इन बैठकों में शारीरिक व्यायाम, गीत, खेल और हिंदू सभ्यता के बारे में जानकारी देना शामिल है। इसके अनुमानित 50 लाख प्रतिभागियों में से लगभग सभी बिना वेतन वाले स्वयंसेवक थे।

उन्होंने आरएसएस को व्यापक हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन का अगुआ बताया और कहा कि इसने लगभग 2,500 संबद्ध संगठन बनाने में मदद की है। इसके नेटवर्क में धार्मिक समूह, एक मजदूर संघ और निजी स्कूलों का एक बड़ा सिस्टम शामिल है।

ड्रेक्सेल ने लिखा कि पश्चिमी देशों की नाराजगी इतने बड़े और ताकतवर संगठन को रोक नहीं पाएगी। भारत के सबसे प्रभावशाली नागरिक-समाज संगठन के लिए दरवाजे बंद करने से कुछ हासिल नहीं होगा, सिवाय इसके कि आरएसएस के उन गुटों को ताकत मिलेगी, जिनका आलोचक सबसे ज्यादा विरोध करते हैं और जो अक्सर इस बात से सहमत होते हैं कि बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।

ड्रेक्सेल ने कहा कि यह संगठन विशाल, जटिल और तेजी से विकसित होने वाला बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इसकी सार्वजनिक गतिविधियों में धर्मार्थ और समाज-सेवा कार्यक्रम शामिल हैं।

ड्रेक्सेल ने लिखा कि आरएसएस के विचारों का समर्थन किए बिना भी यह समझा जा सकता है कि अमेरिका के लिए इसके साथ जुड़ना और इसे समझने की कोशिश करना बहुत जरूरी है। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति और इंडो-पैसिफिक तथा मध्य पूर्व में इसकी रणनीतिक अहमियत का भी हवाला दिया।

--आईएएनएस

एमएस/एबीएम