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यूएन में भारत बोला- भारतीयों और अफगानों के बीच संबंध आधुनिक नक्शों और सीमाओं से भी पुराने

संबंध आधुनिक नक्शों और सीमाओं से भी पुराने: भारतीयों और अफगानों के
यूएन

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की हालिया बैठक में अफगानिस्तान के राजनीतिक, मानवीय, सुरक्षा और मानवाधिकारों के हालातों पर गंभीर चर्चा की गई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि मैं इस महीने परिषद की अध्यक्षता संभालने पर फ्रांस को बधाई देता हूं और मुझे बोलने का मौका देने के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। मैं अफगानिस्तान के लिए मिशन की प्रमुख और डिप्टी एसआरएसजी (राजनीतिक) जॉर्गेट गैगनन को इस बैठक में जानकारी देने के लिए धन्यवाद देता हूं। हम सिविल सोसाइटी की ओर से दी गई जानकारी पर भी ध्यान देते हैं।

उन्होंने कहा कि पड़ोसी होने के नाते, भारतीयों और अफगानों के बीच संबंध आधुनिक नक्शों और सीमाओं से भी पुराने हैं। काबुल से हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों तक जाने वाली सड़कें न केवल व्यापार के रास्ते थीं, बल्कि विचारों और ज्ञान, विश्वास और आस्था के गलियारे भी थीं। सदियों से इन इलाकों में कई साम्राज्य बने और मिट गए, लेकिन अफगान और भारतीय लोगों के बीच दोस्ती और भाईचारे का धागा कभी नहीं टूटा। यही भावना इस देश के प्रति मेरे देश की नीति का आधार है। हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के पक्ष में हैं, जो अफगानिस्तान के टिकाऊ विकास में मदद कर सके। इसका सबूत दोहा वर्किंग ग्रुप की बैठकों में हमारी भागीदारी, हमारी मजबूत द्विपक्षीय विकास साझेदारी और क्षेत्रीय पहलों में हमारे प्रयासों से मिलता है।

उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मजबूत विश्वास को फिर से दोहराता हूं कि एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया के लिए भारत की साझा आकांक्षा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी गहराई से जुड़ी हुई है। अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास साझेदारी परियोजनाओं के जरिए भारत वहां के विकास में योगदान दे रहा है। अफगानिस्तान के लोगों को सहायता पहुंचाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता जारी रहेगी। हम संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी जैसी अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि अफगानिस्तान में जिन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है, उन तक मदद पहुंचाई जा सके।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अफगान मंत्रियों के भारत दौरे से मानवीय सहायता, विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, क्षमता-निर्माण, नशीले पदार्थों की रोकथाम, खेल, शिक्षा, व्यापार, यात्रा और कनेक्टिविटी में सहयोग पर बातचीत संभव हो पाई है। यह सब 4.8 करोड़ से ज्यादा अफगान लोगों के कल्याण और विकास की जरूरतों के लिए है, जो पिछले पांच वर्षों से भारी अभाव और तकलीफ के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की दुश्मनी और गहरी उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।

यूएन महासचिव की रिपोर्ट में अफगानिस्तान की कमजोर पब्लिक हेल्थ सिस्टम के संकट का जिक्र किया गया है, जिसके कारण इस साल की पहली छमाही में 150 हेल्थ सेंटर बंद हो गए हैं। हम इस गंभीर स्थिति से मुंह नहीं मोड़ सकते और हमें अफगानिस्तान में मानवीय संकट को रोकने के लिए निवेश करना होगा। पिछली तिमाही में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में मदद के लिए हमने 33 टन वैक्सीन और उससे जुड़ी सामग्री भेजी थी। इसके अलावा, इस रिपोर्टिंग अवधि में भारत ने अफगान हेल्थ अधिकारियों को खास मेडिकल उपकरण दिए हैं, जिनमें नवजात और बच्चों की देखभाल के उपकरण, कार्डियोग्राफ मशीन, वेंटिलेटर, पेशेंट मॉनिटर, इलेक्ट्रोकॉटरी उपकरण, प्लास्टिक सर्जरी सेट और खास मेडिकल किट शामिल हैं।

--आईएएनएस

एमएस/