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पश्चिम बंगाल में आपदा प्रबंधन के लिए 'अर्जुन वाहिनी' लॉन्च, एनडीआरएफ की तर्ज पर करेगी काम

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कोलकाता, 1 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 'अर्जुन वाहिनी' की शुरुआत की। इस पहल का लक्ष्य राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की कार्यशैली के अनुरूप एक सुदृढ़ और संगठित आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित करना है।

नई टीम को लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 'अर्जुन वाहिनी' 200 कर्मियों के साथ काम करना शुरू करेगी। इनमें से 100 कर्मी कोलकाता के लिए, 50 कर्मी पहाड़ी इलाकों के लिए और शेष 50 चक्रवात संभावित सुंदरबन इलाके (जो दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना जिलों में फैला है) के लिए होंगे।

मुख्यमंत्री ने इस नई टीम के लॉन्च के मौके पर कहा, "टीम के प्रमुख को 40,000 रुपए का मासिक भत्ता मिलेगा, जबकि टीम के अन्य सदस्यों को 25,000 रुपए का भत्ता मिलेगा। उनके भत्ते में हर साल तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। चूंकि इस टीम के सदस्य मुश्किल हालात में और जोखिम भरे इलाकों में काम करेंगे, इसलिए गंभीर चोट या मौत होने पर उन्हें 10 लाख रुपए और दिव्यांगता होने पर 5 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा।"

उन्होंने कहा, "'अर्जुन वाहिनी' मुख्य रूप से रिटायर हो चुके सैनिकों और अग्निवीरों से बनाई जाएगी। भविष्य में इस फोर्स को एनडीआरएफ जैसे ही उपकरण और टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा।"

राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए एक खास टीम बनाने का फैसला तब लिया था, जब इस साल जून में कोलकाता के तारातला में बन रहा एक गोदाम ढह गया था और उसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि राज्य के पास एनडीआरएफ जैसी ही आपदा प्रबंधन की अपनी खास टीम हो।

उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि नई टीम 200 सदस्यों के साथ काम करना शुरू करेगी, लेकिन भविष्य में इनकी संख्या काफी बढ़ाई जाएगी।

सीएम सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आपदा प्रबंधन के मुद्दे को नजरअंदाज करने और इसके बजाय रियल एस्टेट डेवलपमेंट में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया, जिससे अक्सर आपदाएं होती थीं।

उन्होंने कहा, "ज्यादा पैसे कमाने की होड़ में पिछली सरकार के दौरान वेटलैंड पर कब्जा करके गैरकानूनी तरीके से इमारतें और घर बनाने के लिए संस्थागत भ्रष्टाचार का सहारा लिया गया। अक्सर बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए ही बिल्डिंग प्लान को मंजूरी दे दी जाती थी।"

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी