कोलकाता, 21 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में दो होटलों में लगातार आग लगने की घटनाओं के बाद पश्चिम बंगाल अग्निशमन विभाग ने राज्य के सभी होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस के लिए एग्जिट डोर (बाहर निकलने के दरवाजे) के रखरखाव को लेकर सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने का फैसला किया है। बीरभूम जिले के तारापीठ और सेंट्रल कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर लगी आग में 18 लोगों की मौत हो गई थी।
फायर सर्विस डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एक शुरुआती ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। एग्जिट दरवाजों के बारे में नई गाइडलाइंस लागू होने के बाद हॉस्पिटैलिटी से जुड़ी संस्थाओं के लिए इनका पालन करना जरूरी होगा। साथ ही, यह पक्का करने के लिए रेगुलर चेकिंग की जाएगी कि नए नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है या नहीं।
इन नई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के बारे में बताते हुए अधिकारी ने कहा कि सबसे पहली प्राथमिकता यह होगी कि हर हाल में एग्जिट दरवाजे हमेशा बिना ताले के (अनलॉक) रखे जाएं और साथ ही एग्जिट दरवाजों तक जाने वाले रास्तों पर कोई भी सामान रखकर उन्हें ब्लॉक न किया जाए।
डिपार्टमेंट के अधिकारी ने कहा, "इसके अलावा, एग्जिट दरवाजे मेटल की ग्रिल-गेट वाली संरचना के होने चाहिए ताकि आग लगने की स्थिति में निकलने वाला धुआं आसानी से बाहर निकल सके। किसी भी हाल में एग्जिट दरवाजे लकड़ी, प्लाईवुड या बोर्ड जैसी आसानी से आग पकड़ने वाली चीजों के नहीं होने चाहिए।"
अधिकारी अनुसार, दूसरी जरूरी गाइडलाइन यह है कि होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस में इमरजेंसी एग्जिट दरवाजों के लिए सही साइनबोर्ड और ट्रेंड स्टाफ का होना जरूरी होगा।
स्टेट फायर सर्विस डिपार्टमेंट के अधिकारी ने कहा, "हॉस्पिटैलिटी से जुड़ी जगहों के लिए यह जरूरी होगा कि वे इमरजेंसी की स्थिति में मेहमानों को सुरक्षित जगह पर ले जाने के लिए ट्रेंड स्टाफ रखें। साथ ही, होटल मैनेजमेंट के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे चेक-इन के समय आग जैसी इमरजेंसी की स्थिति में मेहमानों के लिए 'क्या करें और क्या न करें' से जुड़ी जानकारी अपडेट करें।"
तीसरी प्राथमिकता वाली बात यह होगी कि होटल की बिल्डिंग की छत पर जाने वाले दरवाजे हमेशा खुले रखे जाएं और ऐसे दरवाजे मेटल की ग्रिल-गेट वाली संरचना वाले हों। साथ ही, होटल की बिल्डिंग की छत तक जाने वाली सीढ़ियों पर किसी भी चीज का कब्जा या रुकावट नहीं होनी चाहिए।
विभाग के अधिकारी ने कहा, "इससे यह पक्का हो जाएगा कि आग लगने की किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में मेहमान तेजी से छत पर जा सकें और सुरक्षित रूप से तब तक वहाँ रह सकें जब तक उन्हें वहाँ से निकाला न जाए।"
तारापीठ और कोलकाता के होटलों में आग लगने की घटनाओं में बाहर निकलने के अपर्याप्त रास्ते इतनी बड़ी संख्या में मौतों का मुख्य कारण पाए गए थे। अधिकारी ने आगे कहा, "इसलिए नई एसओपी में हमने भविष्य की सावधानियों के लिए इस पहलू पर खास तौर पर जोर देने का फैसला किया है।"
--आईएएनएस
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