Ol Chiki Script : राष्ट्रपति मुर्मू के मार्गदर्शन में संथाली में संविधान का विमोचन, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया धन्यवाद

उपराष्ट्रपति बोले—संथाली समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण, मातृभाषा में संविधान उपलब्ध
राष्ट्रपति मुर्मू के मार्गदर्शन में संथाली में संविधान का विमोचन, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया धन्यवाद

नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में गुरुवार को संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया गया। भारत का संविधान अब संथाली भाषा में ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल हुए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संथाली भाषी समाज के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दावा किया कि इस पहल से संथाली भाषा बोलने वाले लोग अब देश के संविधान को अपनी मातृभाषा में पढ़ और समझ सकेंगे, जिससे संविधान के मूल्यों और अधिकारों के प्रति जागरूकता और अधिक मजबूत होगी।

भारत के उपराष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा गया, "उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन आज राष्ट्रपति भवन में ओल चिकी लिपि में लिखी गई संथाली भाषा में भारत के संविधान के विमोचन समारोह में शामिल हुए। इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने इस पहल के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को धन्यवाद दिया, जिनके मार्गदर्शन में यह काम किया गया। उन्होंने कहा कि इस महान पहल से संथाली बोलने वाले लोग अपनी भाषा में संविधान को पढ़ और समझ पाएंगे।"

पोस्ट में आगे लिखा गया, "उपराष्ट्रपति ने यह भी याद किया कि जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल थीं, तब उन्होंने कई आदिवासी कल्याण के कदम उठाए थे और आदिवासी संस्कृति और भाषाओं को बढ़ावा दिया था, और उन्होंने राज्य के राज्यपाल के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उनकी विरासत को आगे बढ़ाया।"

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर कहा, "अलचिकि लिपि में लिखित संथाली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है। यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संथाली भाषा में प्रकाशित हुआ है। संथाली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संथाली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संथाली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे। संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे।"

संथाली भाषा, जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

--आईएएनएस

 

 

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