श्रीनगर, 9 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता शेख बशीर अहमद ने बुधवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
शेख बशीर अहमद ने वंदे मातरम को लेकर हो रहे विवाद पर भी अपनी पक्ष रखा। उनके मुताबिक, जिसे दो छंद गाना है, वो दो गाए, जिसे चार गाना है, वो चार गाएं, लेकिन किसी को भी बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी चीज को बाध्य करने से उसकी अहमियत कम हो जानी चाहिए। आज की तारीख में भाजपा उन मुद्दों को हवा देने का काम करती है, जो वाकई में मुद्दा ही नहीं है। स्थिति ऐसी है कि कई लोगों को वंदे मातरम के शाब्दिक अर्थ के बारे में ही मालूम नहीं है। उन्हें नहीं पता है कि आखिर इसका मतलब क्या है।
उन्होंने कहा कि मैं बुनियादी तौर पर समझता हूं कि वंदे मातरम की बहस को छोड़ देना चाहिए। जिसे आता है, वो गाए, जिसे नहीं आता है, उसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। गाने को गाने के हिसाब से देखना चाहिए।
इसके अलावा, शेख बशीर अहमद ने जम्मू-कश्मीर में आयोजित हुए फिल्म फेस्टिवल के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि फिल्म फेस्टिवल जम्मू-कश्मीर में इसलिए हुआ, क्योंकि उग्रवादियों ने इस बात को आहिस्ता-आहिस्ता समझना शुरू कर दिया कि उग्रवादियों ने जम्मू-कश्मीर का बेड़ा गर्क कर दिया। फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हुआ, जिसके बारे में जानकर हम सभी को अच्छा लगा, लेकिन अब इसे मुद्दा बनाना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि अर्थविहिन मुद्दों पर बात करने से कोई फायदा नहीं है। हमें महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन हम इन मुद्दों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी वजह से आज मुल्क में इस तरह की स्थिति पैदा हो रही है। हमें इन मुद्दों पर नहीं जाना चाहिए कि वंदे मातरम गाना चाहिए या नहीं। ये सब बेकार के विषय हैं।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से लगातार ऐसी फिल्में आ रही हैं, जिससे ऐसा लगता है कि आखिर आज तक तारीख में देश कहां खड़ा हो गया है। फिक्र मत कीजिए, भाजपा इसी में डूबेगी। हालांकि, धार्मिक फिल्में बनती हैं, पहले भी बनती रही हैं। भाजपा का झूठ अब लोगों को समझ में आ रहा है। लोग अब भाजपा को समझ चुके हैं।
इसके अलावा, उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सीनियर प्रवक्ता तनवीर सादिक के एक बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को यह नहीं पता है कि आज जिस तरह के हालात हैं, वैसे हालात हमेशा से नहीं रहे हैं। 1947 में जम्मू-कश्मीर में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अनाज की कमी थी। कई बार अनाज जम्मू-कश्मीर में नहीं पहुंच पाता था। पहले गाड़ियां नहीं होती थीं। पहले लोग हिजरत करते थे। शेख साहब ने उस जमाने में सियासत की थी, जब इस तरह के हालात बने हुए थे। एमएससी करके आने के बाद उन्होंने राजनीति शुरू की थी। पहले राजा के खिलाफ बोलना भी अपराध माना जाता था, लेकिन शेख साहब ने उसके खिलाफ भी बोला। वो लंबे अर्से तक जेल में रहे। अब कुछ लोग यह कह रहे हैं कि देश 2014 के बाद आजाद हुआ है। ऐसा करके ये लोग देश के लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।
--आईएएनएस
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