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विश्वकर्मा जयंती 2026: एक ही रात में पांच मंदिरों का किया था निर्माण, खुद की सबसे बड़ा मंदिर बनाने लगे थे भगवान विश्वकर्मा

विश्वकर्मा

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में वास्तुकार, इंजीनियर और शिल्पकार माने जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की जयंती इस वर्ष 17 सितंबर को मनाई जाएगी, जिसकी तैयारी भी की जा रही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कई भव्य नगरियों का निर्माण किया था, जिसमें देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ मंदिर भी शामिल है।

बाबा वैद्यनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने इस मंदिर का निर्माण किया था। मान्यता है कि देवताओं ने जंगल से घिरे इस स्थान पर मंदिर स्थापना का निर्णय लिया और देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में इस मंदिर सहित पांच मंदिरों का निर्माण किया था।

भगवान विश्वकर्मा ने सबसे पहले भोलेनाथ का मंदिर बनाया था। इसके बाद मां पार्वती के मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद भगवान गणेश और संध्या मंदिर को बनाया। इन सभी मंदिरों को बनाने के बाद भगवान विश्वकर्मा खुद के लिए सबसे बड़ा और भव्य मंदिर का निर्माण करने लगे। मान्यता है कि उनके ऐसा करने से देवताओं को चिंता हो गई कि भगवान विश्वकर्मा भोलेनाथ के मंदिर से बड़ा स्वयं का मंदिर कैसे बना सकते हैं?

मान्यता है कि भगवान विष्णु ने मुर्गे का रूप धारण करके समय से पहले ही बांग कर दी। मुर्गे की आवाज सुनकर भगवान विश्वकर्मा को लगा कि सुबह हो गई है और एक रात में मंदिर निर्माण का संकल्प अधूरा रह गया। वह मंदिर आज भी अधूरा है, जिसको लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि नारद मुनि ने भोलेनाथ को इसकी जानकारी दी थी कि विश्वकर्मा खुद के मंदिर को भव्य तरीके से बना रहे हैं, तो भोलेनाथ ने उस मंदिर को अपने अंगूठे से दबा दिया था।

बाबा वैद्यनाथ मंदिर न सिर्फ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है बल्कि यह कई मान्यताओं एवं रहस्यों का केंद्र है। इस तरह से भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में 5 मंदिरों का निर्माण किया था। इस वर्ष भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक की जाएगी। अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे) में भी पूजा करना शुभ रहेगा।

--आईएएनएस

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