नवी मुंबई, 14 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को भारतीय भाषाओं के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री को हिंदी में बोलते हुए सुनना देश को गर्व से भर देता है।
फडणवीस नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने देर से आने के लिए माफी मांगी और फिर महाराष्ट्र में इस राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहां पहले ऐसे सम्मेलन केवल औपचारिकता मात्र होते थे, वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने इन्हें अलग-अलग राज्यों में बारी-बारी से आयोजित करने की पहल की।
भाषा नीति के इतिहास पर चर्चा करते हुए फडणवीस ने बताया कि 1963 में हिंदी और अंग्रेजी दोनों को राजभाषा का दर्जा मिलने से पहले भी ब्रिटिश काल में सरकारी कामकाज के लिए हिंदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता था। उन्होंने कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी ने पद संभाला है, देशभर में मातृभाषाओं और आधिकारिक क्षेत्रीय भाषाओं को अभूतपूर्व सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "आपको अपनी मातृभाषा सीखनी चाहिए और नई शिक्षा नीति (एनईपी) स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देकर इसे सुनिश्चित करती है।"
उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो उस समय विपक्ष के नेता थे, संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले शुरुआती लोगों में से एक थे। उन्होंने कहा कि लेखक मुंशी प्रेमचंद ने बोलचाल की हिंदी को सरकारी कामकाज के लिए स्वीकार्य बनाने में अहम भूमिका निभाई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर जोर दिया और कहा कि मराठी भाषा गहरे सम्मान की हकदार है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ही मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।
गृह मंत्री शाह ने महाराष्ट्र की विविधता की सराहना की और इसे भारत का सबसे अधिक बहुभाषी राज्य बताया।
स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक विनोबा भावे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "अगर मैंने हिंदी का इस्तेमाल न किया होता, तो मैं कश्मीर, असम और केरल के हर गांव तक भूदान और ग्रामदान का क्रांतिकारी संदेश नहीं पहुंचा पाता। राजभाषा ने ही मुझे देश भर के लोगों से संवाद करने में सक्षम बनाया।"
नई शिक्षा नीति के माध्यम से भाषा संरक्षण पर केंद्र सरकार के फोकस को दोहराते हुए गृह मंत्री ने जोर दिया कि बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए उसकी मातृभाषा में बुनियादी शिक्षा बहुत जरूरी है।
महाराष्ट्र को वीर सावरकर की धरती बताते हुए उन्होंने कहा कि सावरकर न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे, बल्कि अपने समय के सबसे विद्वान भाषाविदों में से एक भी थे। उन्होंने मराठी भाषा को शुद्ध करने के लोकमान्य तिलक के आह्वान को आगे बढ़ाया और कई ऐसे शब्द गढ़े जो पहले भारतीय भाषाओं में नहीं थे, ऐसे शब्द जिन्हें मराठी और अन्य राष्ट्रीय भाषाओं में स्वाभाविक रूप से अपनाया गया।
गृहमंत्री शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने 'शब्द सिंधु' पहल के जरिए हिंदी में सावरकर की भाषाई विरासत का सम्मान किया।
--आईएएनएस
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