विश्व बाघ दिवस: रॉयल रणथंभौर हेरिटेज ब्रांड ने बाघ संरक्षण के लिए द कॉर्बेट फाउंडेशन से की साझेदारी

विश्व बाघ दिवस: रॉयल रणथंभौर हेरिटेज ब्रांड ने बाघ संरक्षण के लिए द कॉर्बेट फाउंडेशन से की साझेदारी

नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। रैडिको खेतान लिमिटेड के प्रीमियम व्हिस्की ब्रांड रॉयल रणथंभौर व्हिस्की ने विश्व बाघ दिवस के अवसर पर द कॉर्बेट फाउंडेशन के साथ अपनी साझेदारी के जरिए भारत में बाघ संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

यह साझेदारी ब्रांड की उस पहचान को संरक्षण प्रयासों से जोड़ती है, जिसकी प्रेरणा भारत के सबसे प्रसिद्ध बाघ आवासों में से एक से ली गई है। इसका उद्देश्य वन्यजीव आवासों की रक्षा करना और स्थानीय समुदायों तथा वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को मजबूत करना है। भारत में बाघ संरक्षण की यात्रा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव पुनरुद्धार प्रयासों में से एक मानी जाती है।

ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 2018 में 2,967 से बढ़कर 2022 में अनुमानित औसत 3,682 हो गई है, जो प्रति वर्ष 6.1 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। वर्तमान में भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक जंगली बाघों का घर है।

साल 1973 में नौ टाइगर रिजर्व के साथ शुरू की गई प्रोजेक्ट टाइगर पहल अब 18 राज्यों में फैले लगभग 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले 58 टाइगर रिजर्व तक विस्तारित हो चुकी है। हालांकि, भारत के लगभग एक-तिहाई बाघ नामित टाइगर रिजर्व के बाहर रहते हैं, जिससे वन्यजीव गलियारों, आवासों की आपसी कनेक्टिविटी, सामुदायिक भागीदारी और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का महत्व और बढ़ जाता है।

एक ‘अम्ब्रेला स्पीशीज़’ के रूप में बाघों की सुरक्षा करने से जंगलों और उनके आवास साझा करने वाली अनेक अन्य प्रजातियों का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

बाघ हमेशा से रॉयल रणथंभौर की पहचान का केंद्र रहा है। यह केवल शक्ति और शान का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

इसी वर्ष ब्रांड ने रॉयल रणथंभौर हेरिटेज कलेक्शन पेश किया, जिसमें छह सीमित संस्करण वाले कलेक्टिबल पैक शामिल हैं। इन्हें प्रतिष्ठित बाघों से प्रेरित होकर भारत की विशिष्ट कला शैलियों के माध्यम से तैयार किया गया है। इस कलेक्शन ने वन्यजीव, कला और कहानी कहने की परंपरा को एक साथ जोड़ते हुए भारत के कुछ सबसे प्रसिद्ध बाघों की व्यक्तिगत विरासत पर भी ध्यान आकर्षित किया।

द कॉर्बेट फाउंडेशन के साथ अपनी साझेदारी के माध्यम से रॉयल रणथंभौर भारत के वन क्षेत्रों में चल रहे संरक्षण कार्यक्रमों में योगदान देने का प्रयास कर रहा है। फाउंडेशन का कार्य पशु चिकित्सा सेवाएं और पशुधन स्वास्थ्य शिविर, आवास पुनर्स्थापन, जैव विविधता की निगरानी तथा समुदाय आधारित पहल को बढ़ावा देना है, जिससे वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित किया जा सके।

इस अवसर पर रैडिको खेतान लिमिटेड के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर कुणाल मदान ने कहा, “बाघ भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत में गहराई से समाया हुआ है और हमेशा से रॉयल रणथंभौर की कहानी के केंद्र में रहा है। हमारा ब्रांड इस शानदार जीव की गरिमा और विरासत का उत्सव मनाता है, लेकिन हम यह भी समझते हैं कि इससे प्रेरणा लेने के साथ एक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। द कॉर्बेट फाउंडेशन के साथ हमारी साझेदारी सार्थक संरक्षण प्रयासों का समर्थन करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विश्व बाघ दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत के वन्यजीवों की रक्षा के लिए निरंतर और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।”

--आईएएनएस

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