नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा के सांसदों ने विपक्ष, झारखंड सरकार, संत परंपरा और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। सांसदों ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने, झारखंड में छात्रों की अनदेखी करने और सनातन परंपरा का अपमान करने जैसे आरोप लगाए।
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने संसद की कार्यवाही पर बोलते हुए कहा कि सदन में हर विषय पर चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं लेकिन विपक्ष चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ने भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी विषय पर चर्चा करनी है तो उसके लिए प्रस्ताव लाया जा सकता है। राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेता सदन को सुचारु रूप से चलने नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संसद के तीसरे सप्ताह में भी व्यवधान जारी है। नीट परीक्षा से जुड़े कानून पर दोनों सदनों में विस्तार से चर्चा हुई थी और राहुल गांधी को अपनी बात रखने के लिए 50 मिनट का समय भी दिया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस देश के संतों का मज़ाक उड़ाकर सनातन और धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं।
भाजपा सांसद मयंक नायक ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने संतों और साधुओं की तरह गेरुए वस्त्र पहनकर सनातन धर्म और संत परंपरा को बदनाम करने का प्रयास किया है। उन्होंने इस कृत्य का कड़ा विरोध जताते हुए इसे धार्मिक परंपराओं का अपमान बताया।
झारखंड लोक सेवा आयोग पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन पर भाजपा सांसद संजय सेठ ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों से हजारों छात्र रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह उदासीन बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आवास विरोध स्थल से महज एक किलोमीटर दूर होने के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि छात्रों से मिलने नहीं पहुंचा। सेठ ने कहा कि छात्रों को टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई और बारिश के दौरान इस्तेमाल की जा रही प्लास्टिक शीट भी हटा दी गईं, बावजूद इसके छात्र अपने आंदोलन पर डटे हुए हैं।
भाजपा सांसद आदित्य साहू ने भी झारखंड सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों छात्र खुले आसमान के नीचे कठिन परिस्थितियों में आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के पास भोजन और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है, जबकि कांग्रेस इस सरकार का समर्थन कर रही है और छात्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
वहीं, बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी और राहुल सिन्हा ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया। चौधरी ने कहा कि जब देश में एक संविधान और एक कानून है तो शिक्षा व्यवस्था में भी समानता होनी चाहिए।
--आईएएनएस
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