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वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा बने ‘डीजी नेवल ऑपरेशंस’

वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा बने ‘डीजी नेवल ऑपरेशंस’

नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना में वरिष्ठ स्तर पर महत्वपूर्ण नियुक्ति के तहत वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने सोमवार को ‘डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस’ का महत्वपूर्ण कार्यभार संभाला है। वह भारतीय नौसेना के संचालन, समुद्री सुरक्षा, सामरिक अभियानों और ऑपरेशनल तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों का नेतृत्व करेंगे। वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ हैं।

उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (वीएसएम) तथा साल 2025 में अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) से सम्मानित किया जा चुका है। ‘डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस’ के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन क्षमता, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभियानों और उभरती समुद्री चुनौतियों से मुकाबले के लिए लगातार अपनी भूमिका का विस्तार कर रही है।

ऐसे में उनका व्यापक ऑपरेशनल अनुभव और रणनीतिक नेतृत्व नौसेना की युद्धक तैयारियों व देश के समुद्री हितों को मजबूती देगा। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के 78वें पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र हैं। उन्हें 1 जुलाई 1991 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था।

वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन के 61वें पाठ्यक्रम से उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से उच्च कमान पाठ्यक्रम भी पूरा किया है। करीब 35 वर्षों के अपने लंबे और विशिष्ट सैन्य करियर में वाइस एडमिरल चड्ढा ने समुद्र और तट दोनों ही क्षेत्रों पर अनेक महत्वपूर्ण कमान, ऑपरेशन, प्रशिक्षण तथा स्टाफ दायित्व निभाए हैं। समुद्र में उनकी प्रमुख कमानों में भारतीय तटरक्षक बल की इंटरसेप्टर नौका सीजीएस-05 तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस वीर, आईएनएस किरपान और आईएनएस मैसूर की कमान शामिल है।

नौसेना के मुताबिक इन नियुक्तियों के दौरान उन्होंने विभिन्न समुद्री अभियानों, निगरानी कार्यों और राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने रूस की राजधानी मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में नौसैनिक अताशे के रूप में भी सेवाएं दीं। यहां उन्होंने भारत और रूस के बीच नौसैनिक सहयोग तथा रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नौसेना मुख्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अत्यंत निम्न आवृत्ति संचार प्रणाली (वीएलएफ) तथा उपग्रह संचार परियोजनाओं सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया।

इसके अतिरिक्त वह अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा-2016 के निदेशक भी रहे। इसके सफल आयोजन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें भारतीय नौसेना अकादमी का कमांडेंट नियुक्त किया गया। इस पद पर उन्होंने भविष्य के नौसैनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य शिक्षा को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में अकादमी ने भावी नौसैनिक नेतृत्व तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी