छह महीने में एक लाख और नियुक्तियां, 2017 से पहले भर्ती में होती थी लूट : मुख्यमंत्री योगी

सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता: मुख्यमंत्री योगी का दावा, अगले छह महीनों में एक लाख से अधिक नियुक्तियां
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लखनऊ, 19 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला। नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं कोको पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में नियुक्ति-पत्र दे चुकी है और अगले छह महीनों में एक लाख से कम नहीं, बल्कि उससे अधिक युवाओं को नौकरी देने जा रही है।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग उनकी सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अब नियुक्तियों की संख्या गिनते जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये साढ़े 9 लाख नियुक्ति पत्र जो हमने पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में दिए हैं, उसके परिणाम हमारे सामने हैं।”

उन्होंने कहा कि जब भर्ती बोर्ड और आयोग शासन की राजनीति का शिकार नहीं होते और परीक्षाएं पारदर्शी तथा शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न होती हैं तो उसके परिणाम इसी तरह सामने आते हैं। योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हर दूसरे दिन दंगे होते थे और महीनों तक कर्फ्यू लगता था। उनके मुताबिक, उस दौर में भर्ती बोर्डों और आयोगों में “भाई-भतीजों” को बैठाकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को बदनाम कर दिया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी और इससे युवा पलायन के लिए मजबूर होता था। उन्होंने कहा, “युवा पलायन करता था, उसके सामने एक तरफ कुआं था, दूसरी तरफ खाई थी।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के नाम पर किसी व्यक्ति को स्थान नहीं मिलता था और उस समय युवाओं के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। उनके अनुसार, प्रदेश बीमार नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की “मानसिकता बीमार” थी और कार्यप्रणाली भ्रष्ट थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को नियुक्ति-पत्र दिए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा, “2017 के पहले जिन्होंने इस नियुक्ति-पत्र वितरण के लिए गदर मचाई थी, उनसे कहना चाहूंगा- नोट कर लें, अगले छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को हम नियुक्ति-पत्र देने जा रहे हैं।” उन्होंने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा, “एक लाख से कम नहीं, उससे ज्यादा ही नौजवानों को अगले छह महीनों में नौकरी देने जा रहे हैं।” यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब प्रदेश सरकार ने छह महीने में एक लाख सरकारी नियुक्तियां देने का अभियान शुरू करने की बात कही है। योगी ने पिछली सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “2017 के पहले यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन का चेयरमैन एक ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो स्वयं उसके लिए योग्य नहीं था।” मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मामला न्यायालय तक पहुंचा और अदालत को उस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश देना पड़ा। उन्होंने कहा कि पिछली व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट पैदा कर दिया था। ‘चाचा-भतीजे की जोड़ी निकल पड़ती थी लूटपाट के लिए’ मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इन्हीं नौकरियों में पहले “डकैती डालने के लिए चाचा-भतीजे की जोड़ी निकल पड़ती थी” और आज वही लोग उपदेशक की भूमिका में हैं। उन्होंने कहा, “2027 के बाद उपदेशक भी नहीं रह पाएंगे।”

योगी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों ने उत्तर प्रदेश के नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, प्रदेश के सामने पहचान का संकट खड़ा किया और बेटियों की सुरक्षा, किसानों तथा आम नागरिकों के हितों की अनदेखी की, उन्हें जनता स्वीकार नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तर प्रदेश जैसे उत्सव प्रदेश को उपद्रवग्रस्त बना दिया था।”

उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था और भर्ती व्यवस्था में बदलाव किया है तथा युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए नियुक्तियां दी जा रही हैं। 19 सितंबर के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गईं।

--आईएएनएस

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