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उत्तर प्रदेश: राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी लाएगी सरकार की नई डिजिटल क्रांति

उत्तर

लखनऊ, 3 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार राजस्व वादों के के तय समय सीमा में निस्तारण और पारदर्शिता को लेकर काफी गंभीर है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड की ओर से गुरुवार को तीन पोर्टल को लांच किया गया।

बोर्ड की ओर से राजस्व वादों के मामलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए ई फाइलिंग पोर्टल, लोवर कोर्ट रिकार्ड को ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए ऑनलाइन ट्रांसमिशन ऑफ लोवर कोर्ट रिकार्ड पोर्टल और धारा-34 के तहत नामांतरण के विभिन्न मामलों को तेजी से निपटाने एवं पारदर्शी बनाने के लिए धारा-34 के नामांतरण पोर्टल के बीटा वर्जन का शुभारंभ किया गया।

उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने तीनों पोर्टल का शुभारंभ करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रदेश के राजस्व न्यायालय में लंबित वादों को तय समय सीमा के साथ पारदर्शी तरीके से निस्तारण पर काफी जोर है। ऐसे में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए नये राजस्व वादों के मामलों के रजिस्ट्रेशन के लिए ई फाइलिंग पोर्टल, लोवर कोर्ट में राजस्व वादों के रिकार्ड को ऑनलाइन करने के लिए ऑनलाइन ट्रांसमिशन ऑफ लोवर कोर्ट रिकार्ड पोर्टल और धारा-34 के तहत नामांतरण के विभिन्न मामलों को तेजी से निपटाने एवं पारदर्शी बनाने के लिए धारा-34 के नामांतरण पोर्टल के बीटा वर्जन का शुभारंभ किया गया।

उन्होंने बताया कि ई फाइलिंग पोर्टल और ऑनलाइन ट्रांसमिशन ऑफ लोवर कोर्ट रिकार्ड पोर्टल का इस्तेमाल शुरुआत में बोर्ड स्तर पर किया जाएगा। बाद में इसे मंडल स्तर और फिर जिला स्तर पर संचालित किया जाएगा। यह पोर्टल आरसीसीएमएस से लिंक होगा।

अध्यक्ष ने बताया कि राजस्व वादों के रजिस्ट्रेशन के लिए मैनुअल और आॅनलाइन दोनों व्यवस्था संचालित होंगी ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड की आयुक्त एंव सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि बोर्ड में सबसे ज्यादा मामले धारा-34 के तहत नामांतरण के आते हैं। ऐसे में इन मामलों को तय समय सीमा में निस्तारित करने एवं संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने के लिए धारा-34 के नामांतरण पोर्टल के बीटा वर्जन का शुभारंभ किया गया है। इस फिलहाल चार जनपदों क्रमश: श्रावस्ती, बांदा, बलरामपुर और हरदोई से संचालित किया जाएगा है। इसके बाद इसे प्रदेश के अन्य जनपदों में भी लागू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि धारा-34 नामांतरण एक्ट में किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि पोर्टल से नामांतरण के लिए लोगों को बार-बार आफिस के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा।

राजस्व वादों को ऑनलाइन दर्ज किया जा सकेगा। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी, मामलों के पंजीकरण में तेजी आएगी और वाद की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक करना आसान होगा।

निचली अदालतों से राजस्व वादों के रिकॉर्ड ऑनलाइन भेजे और ट्रैक किए जा सकेंगे। इससे रिकॉर्ड भेजने में लगने वाला समय कम होगा और फाइलों के गुम होने या देरी की संभावना घटेगी।

नामांतरण के मामलों की ऑनलाइन निगरानी हो सकेगी। इससे मामलों के समयबद्ध निस्तारण में मदद मिलेगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। लोगों को नामांतरण के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।

--आईएएनएस

विकेटी/एएसएच