उत्तर प्रदेश के एसीएस (गृह) संजय प्रसाद के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

उत्तर प्रदेश के एसीएस (गृह) संजय प्रसाद के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं और फैसले की प्रति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को उनके भविष्य के पदस्थापन पर विचार के लिए भेजने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने संजय प्रसाद द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के 3 जून के उस फैसले को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी, जो एक नाबालिग लड़की की बरामदगी से जुड़े बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) मामले में दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी दाखिल करने की अनुमति देते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले को 10 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, "नोटिस जारी किया जाता है, जो 10 सप्ताह में प्रत्यावर्तनीय होगा। इस बीच, हाईकोर्ट के विवादित आदेश में दिए गए निर्देशों के अमल पर रोक रहेगी।"

यह मामला उस हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है, जिसे एक नाबालिग लड़की की मां ने दायर किया था। लड़की कथित तौर पर जून 2025 में लापता हो गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि लड़की को बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है, लेकिन साथ ही गृह विभाग की कार्यप्रणाली और वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण पर विस्तृत टिप्पणियां भी की थीं।

हाईकोर्ट के एकलपीठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने अपने आदेश में कहा था कि उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद के आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इसके बाद हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया था कि फैसले की प्रमाणित प्रति और 'सुभाष चंद्र बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले के निर्णय की प्रति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव को भेजी जाए, ताकि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के कैडर नियंत्रक प्राधिकरण के रूप में इसे अभिलेख, संदर्भ और भविष्य में नियुक्ति समिति (एसीसी) द्वारा अधिकारी की उपयुक्तता के आकलन के संदर्भ में आवश्यक विचार के लिए रखा जा सके।

हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इन निर्देशों के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है और मामले की अगली सुनवाई 10 सप्ताह बाद होगी।

--आईएएनएस

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