Ramzan Loudspeaker Controversy : रमजान में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति न देकर सरकार ने किया भेदभाव: कमल अख्तर

रमजान में लाउडस्पीकर पर रोक, कमाल अख्तर ने सरकार पर साधा निशाना
रमजान में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति न देकर सरकार ने किया भेदभाव: कमल अख्तर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रमजान महीने में भी मस्जिदों पर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति देने से इस बार भी मना कर दिया है। अब इस मामले पर समाजवादी पार्टी के विधानसभा के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर ने प्रतिक्रिया दी है।

विधानसभा में गुरुवार को रमजान के दौरान रोजा इफ्तार तथा सहरी के वक्त लाउडस्पीकर के माध्यम से उद्घोष करने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए नकार दिया गया था।

समाजवादी पार्टी के विधानसभा के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हमारे प्रदेश और देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। हमारा देश धर्म प्रधान है। यहां समय-समय पर सभी धर्मों के त्योहार आते रहते हैं। हर धर्म के लोग अपने त्योहारों को बड़े उल्लास के साथ मनाते हैं। सरकार हर त्योहार पर सुरक्षा सहित अन्य इंतजाम करती है।"

कमाल अख्तर ने कहा, "जब कांवड़ यात्रा निकलती है तो सरकार उनके लिए रास्ते अच्छे करती है, रूट डायवर्जन होता है। होली पर भी सरकार पूरे इंतजाम करती है। इसी तरह मुसलमानों के लिए रमजान का महीना सबसे पवित्र माना जाता है। रमजान के दौरान लोग रोजा रखते हैं, अमन-चैन के लिए इबादत करते हैं। पहले सरकार रमजान में व्यवस्थाएं करती थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में वर्तमान सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटा दिए हैं।"

कमाल अख्तर ने कहा कि रमजान के दौरान इफ्तार तथा सहरी के लिए ऐलान किया जाता है। इसको लेकर उन्होंने लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिससे यह साबित हो जाता है कि सरकार का 'सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास' नारा खोखला है। मैंने रामलीला का उदाहरण देते हुए रमजान में लाउडस्पीकर की अनुमति मांगी थी, लेकिन नहीं दी गई।

गौरतलब है कि विधानसभा में गुरुवार को रमजान के दौरान लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति मांगने पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा था कि इस पर विचार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश रात में 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं बजाने का है। यह परंपरा उस समय की है, जब घड़ियां नहीं होती थीं।

--आईएएनएस

 

 

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