नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस की ओर से 'वंदे मातरम' को पूरा नहीं गाने को लेकर फैसले पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस को कम से कम इतनी सदबुद्धि तो आई कि दो छंद गाएंगे। अब उनको यह महसूस हो रहा है कि हमने 'वंदे मातरम' का विरोध करके गलत किया। आधा गाने और आधा न गाने वाला नाटक देश पसंद नहीं करेगा। इसको लेकर कांग्रेस की ओर से नाटकबाजी की जा रही है।
बिहार सरकार मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, "वंदे मातरम हम सभी और देश के हर नागरिक के लिए एक गीत है। यह हमारी आजादी की लड़ाई का प्रतीक है और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने फैसला किया है कि वंदे मातरम की सिर्फ दो लाइनें ही गाई जाएंगी, जो आपत्तिजनक है।"
बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने आईएएनएस से कहा कि 'वंदे मातरम' को कांग्रेस ही लेकर आई थी। इसे बनाने वाले सभी लोग कांग्रेस से ही थे। बंटवारे के बाद, 'वंदे मातरम' को लेकर लोगों के बीच दो तरह की राय थी। लेकिन आप इसका सिर्फ कुछ हिस्सा तो नहीं गा सकते, है ना? अगर आपको महादेव का कोई श्लोक पढ़ना हो, तो आप आधा श्लोक नहीं पढ़ सकते; आपको पूरा श्लोक पढ़ना होगा।"
शिवसेना नेता और लेजिस्लेटिव काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन सचिन अहीर ने 'वंदे मातरम' मामले को लेकर कहा कि मैं एक बात साफ करना चाहता हूं, कानून सबके लिए एक जैसा है, चाहे कोई बड़ा हो या छोटा। हर किसी को अपनी मर्जी से कानून का पालन करने का अधिकार है। जब कानून का पालन किया जा रहा हो, और खासकर जब कोई मौका 150 साल पूरे होने का हो और सम्मान की बात हो, तो इसमें क्या दिक्कत है? मैं इस बात से भी सहमत हूं कि देश में ज्यादातर लोगों (80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों) के लिए ये दो ही गान जाने-पहचाने हैं, जिनमें आप और मैं भी शामिल हैं।"
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि 'वंदे मातरम' से उनका क्या लेना-देना है? उन्होंने 50 साल तक आरएसएस हेडक्वार्टर पर तिरंगा क्यों नहीं फहराया? अचानक उन्हें ऐसा क्या हो गया कि उन्हें 'वंदे मातरम' से प्यार हो गया? कांग्रेस इसे 90 साल से गा रही है। मैं इसे 50 साल से गा रहा हूं। उनके पास कोई जवाब नहीं है। वे बस लोगों को गुमराह कर रहे हैं।"
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा, "यह वही वंदे मातरम है जिसके लिए हमारे महान नेताओं (सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद) ने आजादी की लड़ाई के दौरान अपनी जान दी थी। यह वही वंदे मातरम है जिसे उन्होंने गाया था और जिसकी बात हम आज कर रहे हैं।"
--आईएएनएस
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