अगरतला, 28 अगस्त (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है। हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी में तेजी आई है और कई मामलों में इन ड्रग्स ने पारंपरिक तथा प्राकृतिक नशीले पदार्थों की जगह ले ली है।
त्रिपुरा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोपाल चंद्र रॉय द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस मिलकर राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा, "सरकार के लगातार प्रयासों के कारण इस वर्ष जुलाई तक ड्रग तस्करों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़कर 14.7 प्रतिशत हो गई है, जबकि 2023 में यह 11.7 प्रतिशत थी।"
कांग्रेस विधायक गोपाल चंद्र रॉय ने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी भी नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े किसी भी अवैध काम में शामिल व्यक्ति को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ड्रग तस्करों और नशे के कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नशे के दुष्प्रभावों को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चला रही है। मैंने व्यक्तिगत रूप से अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों पर नजर रखें ताकि वे नशे की लत से दूर रहें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए पुलिस और न्यायपालिका के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है। राज्य पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की जांच के लिए विशेष इकाई भी बनाई है।
कांग्रेस विधायक गोपाल चंद्र रॉय ने दावा किया कि राज्य में रेल मार्ग के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही है और ड्रग्स का कारोबार त्रिपुरा में बड़े पैमाने पर फैल चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भारत में प्रतिबंधित अत्यधिक नशे वाली मेथामफेटामाइन गोलियां, हेरोइन और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से त्रिपुरा में की जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप, जिसका बांग्लादेश में नशे के रूप में अवैध इस्तेमाल होता है, उसकी भी तस्करी की जाती है।
पुलिस के अनुसार, मिजोरम और मणिपुर पूर्वोत्तर भारत में ड्रग तस्करी के प्रमुख गलियारे बनकर उभरे हैं। इसका कारण म्यांमार के साथ उनकी लंबी और खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र के निकट होना है, जो दुनिया के सबसे बड़े अवैध मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
--आईएएनएस
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