देहरादून, 20 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामलों, जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन, संसद के मानसून सत्र समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से कार्य कर रही है, जबकि विपक्ष के पास जनता से जुड़े ठोस मुद्दों का अभाव है।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की घटनाओं पर मंत्री भरत चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था को ठेस पहुंचाना केवल अपराध ही नहीं, बल्कि एक जघन्य पाप भी है। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के तहत अधिकतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ऐसे मामलों में किसी प्रकार की क्षमा की कोई गुंजाइश नहीं है। दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा और धार्मिक आस्था का अपमान करने वालों को अपने कर्मों का परिणाम भी भुगतना पड़ेगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन और वहां लगाए गए नारों पर मंत्री ने कहा कि भारत एक स्वतंत्र और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। हालांकि, अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ यह नहीं है कि कोई देश-विरोधी या गैर-जिम्मेदाराना नारे लगाए। कुछ सौ लोगों की भीड़ इकट्ठा कर इस प्रकार की नारेबाजी करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन उसकी भी एक संवैधानिक और नैतिक सीमा होती है।
संसद के मानसून सत्र को लेकर भरत चौधरी ने कहा कि यह सत्र कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लिए अहम साबित होगा। सरकार छह से सात महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी सरकार सकारात्मक माहौल तैयार करने की दिशा में प्रयासरत है, ताकि इस विषय पर व्यापक सहमति बन सके।
उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही बिजली की खपत पर मंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है, जिसके कारण बिजली की आवश्यकता भी बढ़ी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है और इस पर सकारात्मक आश्वासन भी मिला है। चौधरी ने मुख्यमंत्री धामी को युवा और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि वह प्रदेश के विकास और जरूरतों को लेकर लगातार केंद्रीय मंत्रियों के संपर्क में रहते हैं तथा राज्यहित में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं को लेकर मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं किसी के नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन सरकार का लक्ष्य त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना है। जहां भी सड़कें बंद होती हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए जाते हैं ताकि जनजीवन जल्द सामान्य हो सके। एसडीआरएफ, नागरिक प्रशासन, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में न्यूनतम समय में राहत कार्य शुरू किया जा सके और नुकसान को कम से कम रखा जा सके।
विपक्ष की आलोचना करते हुए भरत चौधरी ने कहा कि कांग्रेस के पास अब जनहित से जुड़े ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और आज भी उसी रास्ते पर चल रही है। जनता पहले भी इस राजनीति को नकार चुकी है और भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि अतीत में इसी प्रकार की राजनीति का खामियाजा उसे चुनावों में भुगतना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी अपनी रणनीति बदलने को तैयार नहीं दिखाई देती।
--आईएएनएस
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