Advertisement banner

दिशा केस में सीबीआई खोलेगी राज, आदित्य ठाकरे की भूमिका की होगी जांच: संजय निरुपम

सीबीआई जांच में दिशा सालियन मामले में किन लोगों की भूमिका होगी उजागर
दिशा

मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने दिशा सालियन की मौत के मामले में सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान और यूपीआई-रुपे पेमेंट चार्ज से जुड़े फैसले पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने दिशा सालियन मामले की सीबीआई जांच को मुंबई हाईकोर्ट के आदेश का परिणाम बताते हुए कहा कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका थी। वहीं, यूसीसी को लेकर उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों से इसका समर्थन करने की अपील की और यूपीआी के छोटे डिजिटल भुगतानों पर शुल्क नहीं लगाने के फैसले का स्वागत किया।

दिशा सालियन की मौत के मामले में दर्ज सीबीआई की एफआईआर पर संजय निरुपम ने कहा कि लंबे समय से इस प्रकरण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मुंबई पुलिस ने कथित तौर पर मामले की जांच को दबाने का प्रयास किया था। मामले में जांच की मांग दिशा सालियन के पिता ने मुंबई हाईकोर्ट के सामने उठाई थी और अदालत के आदेश के बाद सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी मिली है। अब सीबीआई की जांच में यह पता चलेगा कि मामले में किन लोगों की क्या भूमिका थी और पहले की जांच में किसी प्रकार की कमी या दबाव था या नहीं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।

संजय निरुपम ने दिशा सालियन मामले में आदित्य ठाकरे के नाम का भी उल्लेख किया और कहा कि जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि उनकी कोई भूमिका थी या नहीं। उन्होंने मामले से जुड़े कुछ अन्य लोगों को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां कीं और उनके कथित आपराधिक या विवादास्पद अतीत का हवाला दिया। निरुपम ने दिशा सालियन के पिता, मुंबई हाईकोर्ट और सीबीआई का जिक्र करते हुए कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि एजेंसी मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच करेगी।

समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर निरुपम ने कहा कि शिवसेना यूसीसी के समर्थन में है। देश में भाजपा और एनडीए की सरकार वाले राज्यों में आने वाले वर्षों में इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। समान नागरिक संहिता किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के कारण महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने की दिशा में यूसीसी को एक व्यापक कानूनी व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यूसीसी का उद्देश्य किसी धर्म की पहचान खत्म करना नहीं, बल्कि नागरिक कानूनों में समानता स्थापित करना है। निरुपम ने आगे कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को यूसीसी को लेकर कुछ आपत्तियां हो सकती हैं। उन्होंने जदयू से अपील की कि वह इस विषय को धर्म के चश्मे से न देखे।

उन्होंने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता लागू होती है तो विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और बच्चों को गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था हो सकती है। इससे अलग-अलग समुदायों के बीच नागरिक अधिकारों के संदर्भ में एक समान व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

यूपीआई-रुपे पेमेंट चार्ज को लेकर पूछे गए सवाल पर शिवसेना प्रवक्ता ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को लेकर सरकार ने छोटे लेनदेन करने वाले आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखा है। भुगतान से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत 2 हजार रुपए तक के भुगतान पर कोई टैक्स या अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच यूपीआी के माध्यम से होने वाले आर्थिक लेनदेन को भी इस व्यवस्था में अलग तरीके से देखा गया है और उस पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। छोटे डिजिटल भुगतान करने वाले आम लोगों और उपभोक्ताओं को राहत देने वाली ऐसी व्यवस्था का स्वागत किया जाना चाहिए।

निरुपम ने कहा कि यूपीआई देश में रोजमर्रा के छोटे-बड़े आर्थिक लेनदेन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में छोटे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने का फैसला आम नागरिकों के लिए उपयोगी हो सकता है। सरकार द्वारा डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल और कम लागत वाला बनाए रखने के प्रयासों से आम लोगों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े नियमों को स्पष्ट रखना भी जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं और कारोबारियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

--आईएएनएस

पीएसके