नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (एएटीएस) ने राजधानी के संगम विहार इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि यह कॉल सेंटर नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने के बहाने बेरोजगार लोगों से कथित तौर पर धोखाधड़ी कर रहा था और पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की उम्र 19 से 30 साल के बीच है।
पुलिस के बयान के मुताबिक, 1 सितंबर को एएटीएस व नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की टीम को संगम विहार के झरोदा माजरा में चल रहे एक संदिग्ध फर्जी कॉल सेंटर के बारे में गुप्त जानकारी मिली। इस कॉल सेंटर से नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने के बहाने बेरोजगार लोगों से धोखाधड़ी की जा रही थी।
जानकारी की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने कॉल सेंटर पर छापा मारा। छापे के दौरान सतीश चंद्र मौर्य और दूसरे टेली-कॉलर कॉल सेंटर चलाते हुए पाए गए। तीन आरोपी नौकरी चाहने वालों से संपर्क करके और अलग-अलग झूठे बहाने बनाकर पैसे मांगते हुए, कथित तौर पर धोखाधड़ी वाला भर्ती का काम करते हुए पाए गए।
शुरुआती जांच से पता चला कि बेरोजगार उम्मीदवारों से संपर्क करके उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसी नौकरियों का ऑफर दिया जाता था। बेरोजगारों को भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में पैसे देने के लिए उकसाया जाता था। फर्जी कॉल सेंटर से तलाशी के दौरान 9 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 7 डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर लिखे तीन नोटपैड और 6,730 रुपये नकद बरामद हुए।
आगे की जांच में पता चला कि आरोपी 'जॉब है सपोर्ट' नाम के एक ऐप के जरिए नौकरी चाहने वालों की निजी जानकारी हासिल कर रहे थे। इस ऐप पर उम्मीदवार खुद को रजिस्टर करते थे और नौकरी के अलग-अलग मौकों के लिए अप्लाई करते थे। आरोपी खास तौर पर उन उम्मीदवारों को निशाना बनाते थे, जिन्होंने 'टाटा मोटर्स' में नौकरी के लिए अप्लाई किया था और फिर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रतिनिधि बनकर उनसे संपर्क करते थे।
आरोपियों ने उम्मीदवारों को यह कहकर गुमराह किया कि भर्ती के अलग-अलग चरणों को पूरा करने के लिए कई तरह के पेमेंट जरूरी हैं और इस तरह झूठे बहाने बनाकर उनसे बार-बार पैसे जमा करवाए।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस टीम को इस धोखाधड़ी वाले भर्ती नेटवर्क में दो और आरोपियों के शामिल होने का पता चला। बाद में दोनों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उनकी भूमिकाओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगार लोगों को नामी कंपनियों में नौकरी का लालच देकर ठगने का एक व्यवस्थित तरीका अपनाया था। शुरुआत में संभावित उम्मीदवारों से संपर्क किया जाता था और उनसे कूरियर चार्ज के तौर पर 499 रुपये जमा करने को कहा जाता था। एक बार शुरुआती पेमेंट हो जाने के बाद आरोपी अलग-अलग झूठे बहाने बनाकर उनसे और पैसे वसूलते रहते थे।
आरोपी एक के बाद एक पेमेंट की मांग करके पीड़ितों को इस फर्जी भर्ती प्रक्रिया में उलझाए रखते थे। जब कोई पीड़ित और पैसे देने से मना कर देता या असमर्थता जताता तो आरोपी उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते और अचानक बातचीत बंद कर देते थे।
पुलिस ने बताया कि अन्य साथियों की पहचान करने, पैसों के लेन-देन का पता लगाने और धोखाधड़ी के पूरे दायरे का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।
--आईएएनएस
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