नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (वेस्टर्न रेंज-II) ने साइबर ठगी के एक बड़े अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को 30.06 लाख रुपए की ठगी का शिकार बना रहा था। इस मामले में मुख्य हैंडलर उदित त्यागी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इसके तार चीनी और विदेशी ऑपरेटर्स से भी जुड़े मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला गौरव रस्तोगी की शिकायत पर दर्ज ई-एफआईआर नंबर 27/2025 से शुरू हुआ था। पीड़ित को पहले व्हाट्सएप ग्रुप 'एचओ30' में जोड़ा गया, जहां पार्ट-टाइम जॉब और मोटे मुनाफे वाली ट्रेडिंग स्कीम का लालच दिया गया। भरोसा जीतने के लिए ग्रुप में नकली सक्सेस स्टोरी और मुनाफे के स्क्रीनशॉट शेयर किए जाते थे। बाद में उसे टेलीग्राम पर शिफ्ट किया गया, जहां खुद को फाइनेंशियल एडवाइजर बताने वाले ठगों ने उसे एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर छोटा निवेश करने को कहा।
शुरुआत में ऐप पर मुनाफा दिखा और छोटी रकम निकालने भी दी गई, ताकि पीड़ित को भरोसा हो जाए। इसके बाद मनोवैज्ञानिक तरीके से उसे बड़ी रकम लगाने के लिए उकसाया गया। जब पीड़ित ने पैसा निकालना चाहा तो वीआईपी मेंबरशिप, टैक्स क्लीयरेंस, विड्रॉल चार्ज और सिस्टम मेंटेनेंस के नाम पर बार-बार पैसे मांगे गए। इस तरह धीरे-धीरे उससे 30 लाख रुपए से ज्यादा ठग लिए गए।
जांच में डीसीपी हर्ष इंदोरा के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सतीश मलिक, एसआई अनुज छिकारा और रविंदर सिंह की टेक्निकल टीम ने बड़ा खुलासा किया। यह कोई लोकल गिरोह नहीं, बल्कि 7 लेयर वाला संगठित नेटवर्क निकला। विदेशी स्तर पर चीनी/विदेशी डेवलपर्स फर्जी ऐप्स, वेबसाइट्स और ट्रेडिंग इंटरफेस बनाते थे, जहां नकली बैलेंस और मुनाफा दिखता था। वाट्सअप के जरिए भारत में लोगों को जॉब और इन्वेस्टमेंट के नाम पर ग्रुप में जोड़ा जाता था। आरोपी हकम अली (25, बीकानेर) ने एचओ30 ग्रुप बनाया था। वहीं, टेलीग्राम पर विदेशी ऑपरेटर और भारतीय बिचौलिए मिलकर पीड़ितों को मैनेज करते थे और यूएसडीटी-आईएनआर रेट तय करते थे।
ठगी का पैसा सीधे एक अकाउंट में न रखकर 18 से ज्यादा 'म्यूल अकाउंट्स' में घुमाया जाता था। जांच में मोनिश (22, हापुड़) के फेडरल बैंक अकाउंट में पीड़ित के 5 लाख रुपए मिले। इसे असल में अनीश (22) और अक्षत सिरोही (22, मुरादनगर) ऑपरेट करते थे। इस नेटवर्क का मुख्य कोऑर्डिनेटर एके नाम का शख्स है जो अभी फरार है। वहीं, मुख्य हैंडलर उदित त्यागी (26, मेरठ) म्यूल अकाउंट्स की निगरानी करता था। वह केस दर्ज होने के बाद थाईलैंड, मलेशिया, और यूएई भाग गया था। उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी था। हाल ही में जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते ही ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने उसे पकड़ लिया और क्राइम ब्रांच को सौंप दिया।
पुलिस ने उसके पास से म्यूल अकाउंट की चेकबुक, 7 मोबाइल और सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि उदित का नाम गुजरात के राजकोट में दर्ज 8.16 लाख के साइबर फ्रॉड में भी है।
आईएनसीआरपी डेटा की जांच में आरोपी के अकाउंट्स का लिंक 35 से ज्यादा साइबर क्राइम शिकायतों से मिला है, जो अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं। पुलिस अब विदेशी ऑपरेटर्स की तलाश कर रही है।
--आईएएनएस
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