नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ओमेष सहगल ने शहर में बढ़ती आबादी, अनधिकृत निर्माण और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मौजूदा समस्याओं को केवल भ्रष्टाचार या किसी एक विभाग की लापरवाही से जोड़ना सही नहीं होगा। शहर की वहन क्षमता, तेजी से बढ़ती आबादी, आवास की कमी और कमजोर प्रवर्तन कई समस्याओं की जड़ हैं।
सहगल ने आईएएनएस से कहा कि दिल्ली में बाहर से लगातार बड़ी संख्या में लोग आते हैं। खासकर दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के लिए रहने की व्यवस्था बड़ी चुनौती है। कई छात्र कठिन मेहनत से विश्वविद्यालय में दाखिला लेते हैं, लेकिन दिल्ली में महंगा आवास उनके लिए बड़ी समस्या बन जाता है। ऐसे में वे अपेक्षाकृत सस्ते पीजी, गेस्ट हाउस या अन्य जगहों पर रहने को मजबूर होते हैं।
उन्होंने कहा कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में रहते हुए उन्होंने दिल्ली की वहन क्षमता का आकलन देखा था। उस समय दिल्ली की अधिकतम क्षमता करीब पौने दो करोड़ आंकी गई थी, जबकि अब आबादी इससे काफी आगे निकल चुकी है। इसके बावजूद यदि आबादी और बढ़ती है तो मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव और बढ़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जहां दो या ढाई मंजिल की इमारतें बनती थीं, वहां अब तीन, चार, छह और आठ मंजिल तक निर्माण होता जा रहा है, लेकिन सड़क, पार्किंग, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का ढांचा उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहा।
पूर्व मुख्य सचिव ने कहा कि कुछ मामलों में स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण किए जाने और इसके बावजूद निगरानी नहीं होने की समस्या है। उन्होंने कहा कि पुलिस, एमसीडी और डीडीए जैसी एजेंसियों की मौजूदगी के बावजूद अनधिकृत निर्माण कैसे होते रहते हैं। किसी घटना की पूरी जिम्मेदारी को केवल भ्रष्टाचार बताकर खत्म करना सही नहीं होगा। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों को समय रहते इसकी जानकारी होनी चाहिए और कार्रवाई होनी चाहिए।
घटना के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर सहगल ने वरिष्ठ अधिकारियों के निलंबन को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे अधिकारियों को यह संदेश जाएगा कि केवल कार्यालय में बैठना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें फील्ड में जाकर यह देखना होगा कि अधीनस्थ अधिकारी अपना काम कर रहे हैं या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों पर कार्रवाई से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर खुशी नहीं है, लेकिन शहर के नजरिए से इसे जरूरी संकेत बताया। यदि भविष्य में भी नियमों के उल्लंघन पर वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही तय होती है तो इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
साथ ही, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि बड़ी संख्या में अनधिकृत इमारतों को एक साथ सील कर दिया गया तो उनमें रह रहे हजारों लोग अचानक बेघर हो सकते हैं। इसलिए कार्रवाई के साथ वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी जरूरी है। सहगल ने दिल्ली में छात्रों के लिए सस्ते और सुरक्षित आवासीय सुविधाएं विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं और हर छात्र का दिल्ली में अपना घर नहीं होता। महंगे किराये के कारण वे कम लागत वाले लेकिन जोखिमपूर्ण आवासों की ओर जाने को मजबूर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि गेस्ट हाउस और पीजी चलाने के लिए मौजूदा कानून और लाइसेंस व्यवस्था पहले से मौजूद है। इसलिए नए कानून बनाने के बजाय इन नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। स्कूल-कॉलेज के छात्रों वाले गेस्ट हाउस और पीजी की नियमित जांच की जानी चाहिए।
घटना के बाद फायर ब्रिगेड की कथित देरी पर सहगल ने कहा कि दिल्ली पुलिस की आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को देखते हुए पुलिस के देर से पहुंचने की बात उन्हें सहज नहीं लगती। हालांकि उन्होंने माना कि संकरी गलियों में फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर खड़ी गाड़ियां, दुकानों का बाहर तक सामान रखना और अन्य अतिक्रमण आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता रोकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को सीमित वैधानिक अधिकार देकर चालान और जुर्माना लगाने की शक्ति देने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि छोटी-छोटी समस्याओं पर कार्रवाई के लिए हर बार सरकारी एजेंसी का इंतजार न करना पड़े।
सहगल ने कहा कि दिल्ली में कानूनों की कमी नहीं है। गेस्ट हाउस, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पहले से नियम मौजूद हैं। समस्या इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने दिल्ली की ट्रैफिक, पार्किंग, पैदल मार्गों पर अतिक्रमण और लगातार बढ़ती आबादी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की समस्याएं आपस में जुड़ी हुई हैं और इनके समाधान के लिए सरकार, स्थानीय निकायों तथा आम नागरिकों, सभी को जिम्मेदारी निभानी होगी। केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं, कानून का समय पर और सख्ती से पालन कराना ही वास्तविक समाधान है।
--आईएएनएस
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