नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल के प्रबंधन को गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों, अवैध रूप से शाखाएं चलाने और बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल के संचालन करने वाले ट्रस्ट और उसके नेतृत्व के खिलाफ सबसे सख्त संभव कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारी के अनुसार, स्कूल को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। जवाब नहीं देने की स्थिति में प्रस्तावित कड़ी कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी।
आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने कहा, "एक स्कूल 'लॉको पैरेंटिस' (माता-पिता की भूमिका में) होता है। स्कूल परिसर में मौजूद हर बच्चे के लिए उसकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होती है। अगर कोई संस्था बाल शोषण जैसे गंभीर अपराध को छिपाती है, आवासीय इमारतों के बेसमेंट में अवैध शाखाएं चलाती है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करती है, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।"
उन्होंने कहा कि सरकार स्कूल का प्रबंधन पूरी तरह अपने हाथ में लेने और उसकी जमीन की लीज रद्द करने की सिफारिश करने के लिए भी तैयार है।
शिक्षा निदेशालय की विशेष समितियों द्वारा कई चरणों में की गई आधिकारिक जांच में स्कूल में प्रशासनिक, वित्तीय और नैतिक जिम्मेदारियों में गंभीर लापरवाही सामने आई है।
बयान के अनुसार, जांच में यौन उत्पीड़न की घटना को छिपाने की कोशिश के संकेत मिले हैं। बताया गया कि 30 अप्रैल को स्कूल के प्री-प्राइमरी विंग में नर्सरी कक्षा की एक बच्ची के साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया गया था।
जांच में सामने आया कि स्कूल प्रबंधन ने इस गंभीर घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं दी, जो अनिवार्य बाल सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन है।
जांच में सुरक्षा व्यवस्था में भी खामियां पाई गईं। पुलिस जब मामले की जांच के लिए प्री-प्राइमरी शाखा पहुंची तो वहां लगे 64 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह खराब पाए गए। बयान में कहा गया कि स्कूल ने जानबूझकर कैमरों के रखरखाव के लिए कोई अनुबंध नहीं किया था।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल बिना अनुमति के नरंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय इमारत से नर्सरी और केजी की कक्षाएं अवैध रूप से चला रहा था।
इसके अलावा, इस अवैध इमारत के बेसमेंट का इस्तेमाल छोटे बच्चों के लिए बिना निगरानी वाले गतिविधि क्षेत्र के रूप में किया जा रहा था।
बयान में कहा गया कि स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और पॉक्सो प्रशिक्षित नोडल अधिकारी भी नहीं थे। इसके अलावा सुरक्षा कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था।
--आईएएनएस
एएमटी/डीएससी






