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दिल्ली हादसे के बाद ओडिशा सरकार असुरक्षित इमारतों को लेकर अलर्ट, चलेगा राज्यव्यापी पहचान और ध्वस्तीकरण अभियान

दिल्ली

भुवनेश्वर, 8 सितंबर (आईएएनएस)। नई दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल ही में छात्रों के 5 मंजिला हॉस्टल के गिरने और उसमें सात लोगों की मौत के बाद, ओडिशा सरकार ने पूरे राज्य में जान-माल के लिए खतरा बनी इमारतों की पहचान करने, उनका आकलन करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अभियान तेज कर दिया है।

ओडिशा के आवास और शहरी विकास मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्र ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने पहले ही असुरक्षित सरकारी इमारतों का आकलन कर लिया है और जहां जरूरत थी, वहां नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने स्थिति की नई समीक्षा की है और अधिकारियों को असुरक्षित पाई गई इमारतों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

डॉ. महापात्र ने कहा, "आकलन के आधार पर, असुरक्षित मानी गई सभी सरकारी इमारतों की जांच की गई है और नोटिस भी जारी किए गए हैं। मैंने कल विभाग के साथ एक और समीक्षा बैठक की थी। बहुत जल्द, उन इमारतों को गिराने के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे जो असुरक्षित पाई गई हैं।"

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली असुरक्षित इमारतों के खिलाफ सख्त और समय पर कार्रवाई करेगी। आवास और शहरी विकास विभाग के तहत आने वाली इमारतों को विभाग खुद देखेगा, जबकि अन्य सरकारी विभागों की इमारतों के मामले में संबंधित अधिकारियों को उचित कार्रवाई के लिए सूचित किया जाएगा। अहम बात यह है कि सरकार ने असुरक्षित निजी इमारतों को भी चल रहे सुरक्षा आकलन के दायरे में लाने का फैसला किया है।

मंत्री ने कहा कि लागू नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, खतरनाक या संरचनात्मक रूप से कमजोर स्थिति में पाई गई निजी इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे। व्यापक और समयबद्ध आकलन सुनिश्चित करने के लिए, 15 दिन की जांच और निरीक्षण टीम बनाई गई है। यह टीम संभावित रूप से असुरक्षित मानी गई इमारतों का विस्तृत निरीक्षण करेगी, उनकी संरचनात्मक स्थिति की जांच करेगी और तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

मंत्री ने कहा, "जांच टीम इस मामले की पूरी जांच-पड़ताल करेगी। निरीक्षण के बाद, जो भी इमारतें असुरक्षित श्रेणी में पाई जाएंगी, उन्हें गिरा दिया जाएगा।"

अधिकारियों ने कहा कि यह पहल कटक और पुरी जैसे शहरों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कई पुरानी और निजी स्वामित्व वाली इमारतों की बारीकी से जांच की जरूरत है। संबंधित शहरी स्थानीय निकाय और अन्य अधिकारी जरूरी जांच करेंगे और ऐसी इमारतों की पहचान करेंगे जिनसे निवासियों, पैदल चलने वालों और आम जनता को खतरा हो सकता है।

सरकार ने कहा कि यह कवायद मुख्य रूप से बचाव और सुरक्षा के मकसद से की जा रही है, ताकि जान-माल के नुकसान से पहले ही इमारतों के ढांचे से जुड़े खतरों की पहचान की जा सके। अधिकारी उसी के अनुसार इमारतों की हालत का आकलन करेंगे और जहां भी इमारतें रहने या मरम्मत के लायक नहीं पाई जाएंगी, वहां कार्रवाई शुरू करेंगे।

एचएंडयूडी विभाग शहरी स्थानीय निकायों और अन्य संबंधित सरकारी विभागों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगा कि नोटिस, जांच और उसके बाद की कार्रवाई व्यवस्थित और तय समय-सीमा के भीतर की जाए।

--आईएएनएस

एएसएच/डीएससी