दक्षिण त्रिपुरा, 10 सितंबर (आईएएनएस)। शारदीय नवरात्रि आने में अब एक महीने का समय बचा है। ऐसे में पूरे त्रिपुरा में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया शहर में स्थित ऐतिहासिक योगमाया काली मंदिर में भी इस बार दुर्गा पूजा को लेकर खास तैयारी की जा रही है।
इस मंदिर में सब-डिविजन की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा होती है और हर साल पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ यह त्योहार मनाया जाता है। इस साल पूजा के लिए मूर्तियां बनाने का जिम्मा पश्चिम बंगाल के नबद्वीप से आए 10 कुम्हारों की टीम को दिया गया है। इस टीम की अगुवाई सीनियर कुम्हार रंजीत पाल कर रहे हैं।
रंजीत पाल ने गुरुवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि वह पश्चिम बंगाल के नबद्वीप के रहने वाले हैं और पिछले 26 सालों से ज्यादा समय से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस बार त्रिपुरा में दुर्गा पूजा के लिए विशेष तौर पर खास मूर्तियां बना रहे हैं। देवी दुर्गा की मूर्तियां पारंपरिक पुरानी शैली में बनाई जाएंगी।"
उन्होंने बताया कि एक मूर्ति के लिए उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं और अभी उनकी टीम 5 मूर्तियां बनाने के काम में जुटी हुई है। कुम्हारों की यह टीम पिछले कई दिनों से दिन-रात मूर्तियों को आकार देने में लगी है।
बेलोनिया शहर में स्थित योगमाया काली मंदिर, जिसे योगमाया काली बाड़ी या महामाया काली बाड़ी भी कहा जाता है, क्षेत्र के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह दक्षिण त्रिपुरा के सबसे पुराने काली मंदिरों में गिना जाता है। यहां बंगाली नववर्ष, दुर्गा पूजा और विशेष रूप से दीवाली यानी काली पूजा के अवसर पर बहुत बड़ा मेला और उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
बता दें कि वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।
-- आईएएनएस
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