बरेली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने तस्लीमा नसरीन के यूनिफॉर्म सिविल कोड को समर्थन देने की आलोचना की, इसे शरिया में दखल बताया, और उन पर इस्लाम और मदरसों के खिलाफ हेट स्पीच देने का आरोप लगाया।
लेखिका तस्लीमा नसरीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "इस्लाम महिलाओं को गरिमा, सम्मान, शिष्टाचार और संस्कृति सिखाता है। इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जिसने महिलाओं को अधिकार, दर्जा और सम्मान दिया है। ऐसा सम्मान जो उन्हें कहीं और नहीं मिलता। आज तस्लीमा नसरीन सवाल उठा रही हैं, और उत्तराखंड में यूसीसी पेश किया गया है तथा असम, गुजरात और मध्य प्रदेश में इसे लागू किया गया है। यह यूसीसी असल में शरीयत में दखल है, मुसलमान शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं कर सकते और यूसीसी का पालन नहीं करेंगे।"
बरेलवी ने कहा, "बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन कोलकाता आईं और एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने वहां जो कुछ भी कहा, वह हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) की श्रेणी में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। मदरसों के बारे में उन्होंने जो बातें कहीं, वे पूरी तरह गलत थीं। इतिहास पढ़ें, इतिहास गवाह है कि 1857 से 1947 तक, उलेमा (इस्लामी विद्वानों) और मदरसों के छात्रों ने देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई थी।"
उन्होंने कहा कि रुहेलखंड से लेकर मेरठ, हासिम पुरा, गाजियाबाद और दिल्ली गेट तक 55 हजार उलेमा की लाशें पड़ी थी। ये सब मदरसों की पैदावार और उलेमा थे, जिन्होंने अपनी जान देकर अंग्रेजों को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। आज उनको दहशतगर्द कहा जा रहा है, तस्लीमा नसरीन को शर्म आनी चाहिए।
मौलाना ने आगे कहा कि तस्लीमा नसरीन वही लेखिका हैं जो हमेशा इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ आर्टिकल लिखती हैं। इनको भारत में जगह नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन भारत में कुछ ऐसे संगठन हैं, जो तस्लीमा को तवज्जो देते हैं। यह बहुत अफसोसजनक है, जो तस्लीमा को कोलकाता में कार्यक्रम में शामिल किया गया।
--आईएएनएस
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