चेन्नई, 1 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को मेट्टूर में स्टेनली जलाशय के स्लुइस गेट खोले। कम बारिश और पानी के कम भंडारण के कारण लगभग तीन महीने की देरी के बाद कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया।
सरकार जलाशय में पानी की आवक और उपलब्धता के आधार पर 1 सितंबर से 45 दिनों तक पानी छोड़ने की योजना बना रही है। उम्मीद है कि इससे डेल्टा जिलों की खेती वाली जमीन को फायदा होगा, जहां किसान खेती शुरू करने के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं।
कावेरी डेल्टा में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली कम समय की धान की फसल 'कुरुवई' के लिए मेट्टूर बांध से आम तौर पर हर साल 12 जून को पानी छोड़ा जाता है। हालांकि, इस साल नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में कम बारिश और जलाशय में अपर्याप्त भंडारण के कारण पारंपरिक रूप से पानी छोड़ने की प्रक्रिया को टालना पड़ा।
यह कार्यक्रम 10 मई को मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद मेट्टूर का विजय का पहला दौरा था। पानी छोड़ने का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसान खेती के मौसम में सिंचाई और कावेरी के पानी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
यह शुरुआत कावेरी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहे विवाद के बीच हुई है। सोमवार को तमिलनाडु द्वारा कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने में हुई कमी को पूरा करने के निर्देश देने की मांग के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए टाल दी।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने दोनों राज्यों से अगली सुनवाई से पहले की घटनाओं को रिकॉर्ड पर रखने को कहा।
तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा मामले को रिकॉर्ड किए जाने के बावजूद कर्नाटक कमी को पूरा करने में विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में खेती की बड़ी जमीन कावेरी के पानी पर निर्भर है और अदालत से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि राज्य को उसका उचित हिस्सा मिले। कर्नाटक ने इस आरोप का खंडन किया और कहा कि वह तय मात्रा से ज्यादा पानी छोड़ रहा है।
वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि कर्नाटक ने 9,000 क्यूसेक की जरूरत के मुकाबले 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा। उन्होंने कहा कि बाद में पानी का बहाव 11,000 क्यूसेक से ज्यादा हो गया। बेंच ने देखा कि कर्नाटक ने 12 अगस्त से पानी छोड़ने की मात्रा 11,000 से बढ़ाकर 12,000 क्यूसेक कर दी थी।
तमिलनाडु ने प्राधिकरण के निर्देशों को लागू कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था और चेतावनी दी थी कि पानी की लगातार कमी डेल्टा क्षेत्र की खेती पर बुरा असर डाल सकती है।
--आईएएनएस
डीकेएम/पीएम







