चेन्नई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने अपने वन क्षेत्र के कर्मचारियों को मजबूत करने और वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों, वन अपराधों और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की राज्य की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए 100.72 करोड़ रुपए के पांच साल के कार्यक्रम की घोषणा की है।
वन मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में 'वन क्षेत्र कर्मचारी पुनरुद्धार योजना' का अनावरण किया। यह कार्यक्रम तमिलनाडु भर में वनों और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों के कौशल, तैयारी और काम करने की क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
सरकार पांच वर्षों में 60.58 करोड़ रुपए की लागत से एक व्यापक 'वन अग्नि प्रबंधन योजना' भी शुरू करेगी। यह पहल जंगल की आग की बढ़ती घटनाओं और संवेदनशील क्षेत्रों में रोकथाम, निगरानी और बचाव के उपायों को मजबूत करने की जरूरत को देखते हुए तैयार की गई है।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने और जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों के तहत, ग्रामीण, शहरी और उप-शहरी क्षेत्रों में 25 नेचर पार्क स्थापित किए जाएंगे।
10 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में लोगों की समझ बेहतर होने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता (क्लाइमेट रेजिलिएंस) को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने 1,947 नए भर्ती किए गए वन कर्मचारियों को शुरुआती प्रशिक्षण (इंडक्शन ट्रेनिंग) देने के लिए 12 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।
5 करोड़ रुपए के निवेश से 'वृक्ष वर्गीकरण और वन उत्पाद विश्लेषण केंद्र' भी स्थापित किया जाएगा।
अन्य उपायों में 43 नेचुरलिस्ट ट्रेनीज (प्रकृति-विशेषज्ञ प्रशिक्षुओं) की ट्रेनिंग के लिए 4.2 करोड़ रुपए और वाइल्डलाइफ फोरेंसिक जांच और बीमारी का पता लगाने के लिए एक मोबाइल लैब बनाने के लिए 1 करोड़ रुपए शामिल हैं।
50 लाख रुपए की लागत से पल्मीरा (ताड़ के पेड़) के लिए एक जीनोमिक स्टडी और जेनेटिक सुधार प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
5 लाख रुपए की एक अलग पहल के जरिए जिले के बायोडायवर्सिटी सिंबल (जैव-विविधता प्रतीक) की पहचान की जाएगी। पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार टूरिज्म को बढ़ावा देने और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील मैंग्रोव इलाके में प्रदूषण कम करने के लिए पिचावरम में 2 करोड़ रुपए की लागत से सोलर-पावर्ड या इलेक्ट्रिक नावें भी चलाई जाएंगी।
एक संबंधित घोषणा में, पर्यावरण मंत्री वीके राजीव ने कहा कि हर साल 200 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और पांच सरकारी कॉलेजों को 'ब्लू-ग्रीन कैंपस' में बदला जाएगा।
53.75 करोड़ रुपए के इस प्रोग्राम का मकसद छात्रों को जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी व्यावहारिक उपायों से परिचित कराना है।
उम्मीद है कि ये कैंपस टिकाऊ तौर-तरीके अपनाएंगे और युवाओं में पर्यावरण के प्रति ज्यादा जिम्मेदारी की भावना पैदा करने में मदद करेंगे।
ये सभी उपाय राज्य की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद जमीनी स्तर पर संरक्षण को मजबूत करना, वैज्ञानिक सहायता को बेहतर बनाना और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में छात्रों और समुदायों को शामिल करना है।
--आईएएनएस
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