नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में एक 'फिल्मी विवाद' हुआ। यह विवाद एक्टर से नेता बने मौजूदा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खास फिल्मी अंदाज को लेकर था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को 'स्क्रिप्टेड परफॉर्मेंस' में बदल दिया है।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विजय पर सबसे ज्यादा मुखर होकर आरोप लगाया कि वे कामकाज से जुड़े मुद्दों पर बात करने के बजाय 'स्क्रिप्टेड परफॉर्मेंस' कर रहे थे। उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि भी उनके साथ शामिल हुए और मुख्यमंत्री विजय की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय ने सदन को फिल्म सेट में बदल दिया है और 'स्क्रिप्टेड एक्टिंग' कर रहे हैं।
उन्होंने विजय की 'शॉर्ट स्टोरी' और फिल्मी स्टाइल पर एतराज जताया और इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताया।
मुख्यमंत्री विजय ने स्पीकर जेसीडी प्रभाकर से इजाजत मांगी और फिर उनके 'शॉर्ट स्टोरी' सुनाने और पंच-डायलॉग स्टाइल में बयानबाजी करने के बाद नाटकीय ढंग से हाथ काटने का इशारा किया, जो उनके फिल्मी अंदाज की याद दिलाता है।
तमिलनाडु में फिल्मी सितारों के अपनी ऑन-स्क्रीन पहचान को राजनीति में लाने का एक लंबा इतिहास रहा है।
विजय के इशारे ने इस परंपरा को जारी रखा है और सदन की मर्यादा पर बहस को फिर से शुरू कर दिया है।
भारतीय विधानसभाओं में 'फिल्मी' बयानों और इशारों का इतिहास रहा है, खासकर जब फिल्मी सितारे राजनीति में आए हों।
इनमें फिल्मी सितारों के नाटकीय अंदाज में बात करने से लेकर विधायकों के फिल्मी सीन जैसे प्रॉप्स या इशारों के साथ विरोध प्रदर्शन करना शामिल था।
इसके अलावा, कर्नाटक विधानसभा जैसी जगहों पर ऐसी घटनाएं भी हुई हैं, जहां विधायकों ने बहस के दौरान गाने गाए या सांकेतिक हरकतें कीं, जिससे उन्हें तारीफ और आलोचना दोनों मिलीं।
कहा जाता है कि एक्टर से नेता बने सुनील दत्त ने एक बार फिल्मों के उदाहरण दिए थे, जबकि शिवसेना के विधायकों ने खास तरह की वेशभूषा पहनकर नाटकीय अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया था।
हालांकि, कुछ लोगों को छोड़कर – खासकर संसद में – ज्यादातर एक्टर-सांसद अपने ऑन-स्क्रीन किरदारों की तुलना में शांत ही रहे हैं।
तमिलनाडु का विवाद सदन के भीतर फिल्मी राजनीति की इसी व्यापक परंपरा का हिस्सा है।
--आईएएनएस
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