तमिलनाडु: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विवाद के बीच डीएमके शुरू करेगी कानूनी हेल्पलाइन

तमिलनाडु: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विवाद के बीच डीएमके शुरू करेगी कानूनी हेल्पलाइन

चेन्नई, 8 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्त्री कजगम (टीवीके) सरकार और विपक्षी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच डीएमके ने पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं के लिए राज्यव्यापी कानूनी सहायता नेटवर्क शुरू करने की घोषणा की है।

डीएमके का दावा है कि सरकार की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ 'झूठी शिकायतों' के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार पुलिस और कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर विरोधी आवाजों को दबाने और डराने का प्रयास कर रही है।

पार्टी ने कई बार आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक विरोधियों और सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ गिरफ्तारी, शिकायत और जांच जैसी कार्रवाइयों के जरिए लोकतांत्रिक आलोचना को सीमित करने की कोशिश कर रही है।

पार्टी मुख्यालय से जारी बयान में डीएमके ने बताया कि 25 मई को पार्टी के संगठन सचिव आर.एस. भारती और विधि प्रकोष्ठ के सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. एलंगो ने ऐसे लोगों के लिए विशेष कानूनी सहायता तंत्र बनाने का फैसला किया था, जो कथित तौर पर राजनीतिक कारणों से दर्ज शिकायतों का सामना कर रहे हैं।

बयान में कहा गया कि सरकार की लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आलोचना करने वाले लोगों को कथित रूप से डराया-धमकाया जा रहा है और कानूनी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा हैं।

इन चिंताओं को देखते हुए डीएमके ने कई जिलों में अधिवक्ताओं और कानूनी समन्वयकों की सूची जारी की है, जो प्रभावित लोगों को कानूनी सलाह और सहायता प्रदान करेंगे।

यह नेटवर्क चेन्नई, कांचीपुरम, मदुरै, डिंडीगुल, तूतीकोरिन, विरुधुनगर, तेनकासी, तिरुनेलवेली, कोयंबटूर और तिरुवन्नामलाई सहित कई प्रमुख जिलों को कवर करेगा।

पार्टी ने यह भी कहा कि डीएमके या उसके सदस्यों के खिलाफ लगाए गए कथित निराधार आरोपों, मानहानि अभियानों और बिना सबूत के लगाए गए आरोपों के मामलों में भी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बयान में कहा गया, "यदि लोकतांत्रिक विचारों को झूठी शिकायतों के जरिए दबाया जा रहा है, तो पार्टी कार्यकर्ता और सोशल मीडिया पत्रकार सूचीबद्ध अधिवक्ताओं से उचित कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।"

कानूनी हेल्पलाइन के अलावा डीएमके ने अपने विधि प्रकोष्ठ के माध्यम से एक विशेष ईमेल चैनल भी शुरू किया है, जहां लोग शिकायतें, दस्तावेज और संबंधित मामलों की जानकारी भेज सकेंगे।

पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से इस सुविधा का उपयोग करने की अपील की है, यदि उन्हें लगता है कि उनके खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है।

डीएमके की इस घोषणा से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध की आवाज और राजनीतिक आलोचना से जुड़े मामलों को लेकर डीएमके और सत्तारूढ़ टीवीके सरकार के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई और तेज होने की संभावना है।

--आईएएनएस

एएमटी/एएस