हैदराबाद, 20 जुलाई (आईएएनएस)। तेलंगाना में भाजपा ने हैदराबाद, सिकंदराबाद, मलकाजगिरी और चेवेल्ला लोकसभा सीटों पर स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के दौरान कथित धमकी और गैरकानूनी दखल के आरोपों की जांच की मांग की है। पार्टी ने इस मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव की अगुवाई वाले भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुदर्शन रेड्डी से मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि हैदराबाद, मेडचल और रंगा रेड्डी जिलों में तुरंत दूसरे राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों को रोल ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि हैदराबाद और सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्रों के कई हिस्सों, खासकर हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से चिंताजनक घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जानकारी मिली है कि एआईएमआईएम और कांग्रेस के कुछ नेता और कार्यकर्ता इन क्षेत्रों में रहने वाले कुछ मतदाताओं को डराने, धमकाने और उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया है, "खास तौर पर उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो देश के दूसरे राज्यों से आकर हैदराबाद में कानूनी रूप से रह रहे हैं और अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।"
भाजपा का कहना है कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कुछ मतदाताओं को गलत जानकारी दी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि वे तेलंगाना में वोटर बने रहने के हकदार नहीं हैं और अपने मूल राज्यों में वापस जाकर वोटर बनने का दबाव डाला जा रहा है।
भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से कहा कि अगर ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। साथ ही हर योग्य नागरिक के उस संवैधानिक अधिकार पर भी असर पड़ेगा, जिसके तहत वह बिना किसी डर, दबाव या भेदभाव के वोटर के रूप में अपना नाम दर्ज करा सकता है और चुनाव प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से भाग ले सकता है।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेता, जिनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, लोगों से कह रहे हैं कि उन्हें ग्रामीण इलाकों में वोटर के रूप में अपना नाम दर्ज कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें राज्य और केंद्र सरकार की कई योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी कार्ड अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद ऐसी भ्रामक बातें फैल रही हैं। इसलिए उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से आग्रह किया कि इस मामले में मीडिया के माध्यम से स्पष्ट जानकारी जारी की जाए।
उन्होंने चुनावी गणना प्रक्रिया में डराने-धमकाने और गैर-कानूनी दखलंदाजी के आरोपों की तुरंत जांच की मांग की।
उन्होंने सीईओ से कहा कि वे संबंधित जिला चुनाव अधिकारियों, चुनाव पंजीकरण अधिकारियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को निर्देश दें कि ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
भाजपा ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और निगरानी के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की भी मांग की, ताकि मतदाताओं को किसी भी तरह के दबाव और गलत हस्तक्षेप से बचाया जा सके।
--आईएएनएस
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